82 पर तीन विकेट गिरने के बाद कप्तान घोनी ने कमान संभाली। लेकिन अभी स्कोर में सिर्फ 20 रन ही जुड़े थे कि रहाणे भी 51 के निजी स्कोर पर चलते बने। रैना का आना जाना टू मिनट्स मैगी के समान रहा।
अब धोनी का साथ देने के लिए सिर्फ खुद धोनी ही थे क्योंकि बाक़ी कोई भी बल्लेबाज़ ऐसा नहीं था जिस पर भरोसा किया जा सके। यहां धोनी ने बहुत चतुराई से बल्लेबाज़ी की। अपने साथी को बचाया भी और बग़ैर ख़तरा मोल लिए रन भी बनाते रहे। उन्हें मालूम था कि अगर 200 का आंकड़ा पार करना है तो न सिर्फ़ उनका क्रीज़ पर जमे रहना ज़रुरी है बल्कि सामने वाले कमज़ोर बल्लेबाज़ों का हौंसला भी बढ़ाते रहना है।
धोनी की ये रणनीति काम कर गई। धोनी ने पुछल्ले बल्लेबाज़ कुमार, हरभजन, अक्षर पटेल, यादव और मोहित के साथ खेलकर 123 रन जोड़े और भारत का स्कोर 247 तक पहुंचा दिया जहां भारत लड़ने की स्थिति में आ गया।
अगर भारत ये मैच जीतता है तो यक़ीनन धोनी की ये अब तक की सबसे यादगार पारी मानी जाएगी।
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