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Hindi News खेल क्रिकेट जोफ्रा आर्चर ने अपने सबसे बुरे दौर को किया याद, डॉक्टरों ने भी मान ली थी हार

जोफ्रा आर्चर ने अपने सबसे बुरे दौर को किया याद, डॉक्टरों ने भी मान ली थी हार

वेस्टइंडीज में अंडर-19 खेलने के बाद जोफ्रा चोटिल गए थे और वह दो साल तक क्रिकेट से दूर रहे। जोफ्रा के लिए यह काफी मुश्किल था।

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इंग्लैंड के उभरते हुए तेज गेंदबाज जोफ्रा आर्चर के लिए नेशनल टीम में जगह बनाना आसान नहीं रहा है। जोफ्रा इंग्लैंड से पहले वेस्टइंडीज के लिए अंडर-19 क्रिकेट में खेल चुके हैं। इसके बाद वह इंग्लैंड आकर बस गए और फिर उन्होंने यहां करीब पांच साल तक घरेलू क्रिकेट में खेलने के बाद नेशनल टीम में जगह पाई और पिछले साल इंग्लैंड में हुए विश्व कप में अपनी टीम को खिताब दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी।

हालांकि वेस्टइंडीज में अंडर-19 खेलने के बाद जोफ्रा चोटिल गए थे और वह दो साल तक क्रिकेट से दूर रहे। जोफ्रा के लिए यह काफी मुश्किल था लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और चोट से उबर एक बार फिर से क्रिकेट के मैदान पर दमदार वापसी करने में सफल रहे।

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हालांकि जोफ्रा ने उस समय को अपना सबसे बुरा दौर बताया और उन्हें लगने लगा था कि वह फिर कभी क्रिकेट नहीं खेल पाएंगे।

इंडियन प्रीमियर लीग की फ्रेंचाइजी राजस्थान रॉयल्स के एक पॉडकास्ट में जोफ्रा ने कहा, ‘‘ईमानदारी से कहूं तो वह बुरा दौर था। मैंने दो साल क्रिकेट के बिना बिताये थे। ’’ 

उन्होंने कहा, ‘‘मैं युवा था और खेलना चाहता था। ऐसे में आप अपने युवा होने का पूरा फायदा उठाना चाहते हो क्योंकि अगर आप 20, 21 या यहां तक कि 25 साल के हो जाते हैं और भाग्य साथ नहीं देता तो तब भी आप मौके का इंतजार कर रहे होते हो। ’’ 

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आर्चर ने कहा, ‘‘ऐसे में लोग उन खिलाड़ियों पर दांव नहीं खेलना चाहते हैं जो थोड़ा उम्रदराज हो जाते हैं। ’’ पिछले साल इंग्लैंड की विश्व कप जीत में सुपर ओवर करने वाले आर्चर ने कहा कि तब वह निराश हो गये थे जब डॉक्टरों ने उनसे कहा कि हो सकता कि वह आगे क्रिकेट नहीं खेल पाएं। 

उन्होंने कहा, ‘‘ ऐसा लगा कि जैसे मैंने अपने बेहतरीन दिन गंवा दिये हों। डॉक्टरों ने मुझसे कहा कि अगर उन्हें सुधार नजर नहीं आता है तो हो सकता है कि मैं आगे क्लब क्रिकेट भी नहीं खेल पाऊं। मुझे वह दिन अब भी याद है। मैं निराश था। ’’ 

आर्चर ने कहा, ‘‘मैंने आराम किया और निर्णय लिया कि अगर दर्द कम होगा तो मैं फिर से कोशिश करूंगा। अगर ऐसा नहीं होता तो मैं वापस कॉलेज लौटकर जीवन की दूसरी राह पर चलने लग जाऊंगा। लेकिन सौभाग्य से मैं जैसा चाहता था वैसा ही हुआ। ’’ 

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