नई दिल्ली: बदज़ुबानी में ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट खिलाड़ियों का कोई जवाब नहीं है और उन्हें इस कला में महारत भी हासिल है। अपनी इस कला से वे विरोधी खिलाड़ी का ध्यान भंग करने में सफल भी रहते हैं ख़ासकर तब तो और भी जब वे फ़ील्डिंग कर रहे होते हैं।
लेकिन कुछ ऐसे भी मौक़े आए हैं जब सेर को सवा सेर मिला है यानी उनकी बदज़ुबानी का ऐसा करारा जवाब मिला कि बस उनकी बोलती ही बंद हो गई। हाल ही में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ तीसरे वनडे में भी विराट कोहली ने जैम्स फ़ॉकनर की बोलती बंद कर दी थी।
बहरहाल, हम यहां आपको बता रहे हैं बदज़ुबानी की पांच ऐसी घटनाएं जब ऑस्ट्रेलिया के खिलाड़ी बग़ले झांकने लगे।
RAVI SHASTRI V/S MIKE WHITNEY
1- रवि शास्त्री बनाम माइक व्हाइटनी: "अगर तुम जितना अच्छा बोलते हो उतनी अच्छी बॉलिंग करते तो 12वें खिलाड़ी नहीं होते।"
1991-92 में ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर रवि शास्त्री ने फ़ास्ट बॉलर माइक व्हाइटनी को ऐसे भीगाकर मारा की बेचारा मुंह ताकता रह गया। एक टेस्ट में व्हाइटनी 12वां खिलाड़ी था और फ़ील्डिंग करने आया था। शास्त्री ने एक बॉल पर सिंगल लेने की कोशिश की लेकिन ले नहीं सके। इस पर व्हाइटनी ने फ़ब्ती कसी कि क्रीज़ में ही रहो वर्ना मैं तुम्हारा सिर फोड़ दुंगा।
शास्त्री कब चुप बैठने वाले थे, उन्होंने तुरंत जवाब दिया "अगर तुम जितना अच्छा बोलते हो उतनी अच्छी बॉलिंग करते तो 12वें खिलाड़ी नहीं होते।"
ये सुनकर व्हाइटनी हक्काबक्का रह गया क्योंकि ये वो वक़्त था जब इंडियन्स जवाब देने से कतराते थे।
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