DoT भारत में बिना नेटवर्क के कॉलिंग की तैयारी कर रहा है, लेकिन दिग्गज टेक कंपनियां Apple और Google ने इसे लेकर सवाल उठाए हैं। डायरेक्ट-टू-डिवाइस यानी D2D में मोबाइल हैंडसेट को सीधे सैटेलाइट से कनेक्टिविटी मिलेगी, जिसमें इमरजेंसी के दौरान यूजर बिना नेटवर्क के भी कॉल और मैसेज की सुविधा का लाभ ले सकेंगे। इसके लिए फोन को किसी मोबाइल टावर पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। मोबाइल डिवाइस सीधे सैटेलाइट से कनेक्ट होकर कॉलिंग और मैसेजिंग के लिए यूज किए जा सकेंगे।
दूरसंचार विभाग लंबे समय से सैटेलाइट बेस्ड कम्युनिकेशन पर काम कर रहा है। इस टेक्नोलॉजी को फिलहाल अमेरिका में इस्तेमाल किया जा रहा है, जहां इमरजेंसी में फोन से बिना नेटवर्क के भी कॉलिंग और मैसेज की सुविधा ली जाती है। खास तौर पर यह सुविधा उन दूर-दराज एरिया के लिए फायदेमंद होगा, जहां आस-पास कोई मोबाइल टावर मौजूद नहीं है।
Apple और Google ने क्यों उठाए सवाल?
स्मार्टफोन के लिए ऑपरेटिंग सिस्टम बनाने वाली दोनों कंपनियों ने इसे लेकर सवाल खड़ा कर दिया है। साथ ही, इसके लिए सरकार से क्लियरिटी भी मांगी है। गूगल और एप्पल ने सरकार के सामने अपनी बात रखते हुए कहा कि डायरेक्ट-टू-डिवाइस टेक्नोलॉजी के लिए मोबाइल हैंडसेट को ज्यादा बैटरी और पावर की जरूरत होगी। इसके अलावा फोन का डिजाइन कॉम्पैक्ट होता जा रहा है, जिसकी वजह से डिवाइस में सैटेलाइट के लिए एंटिना लगाना काफी चुनौतीपूर्ण है। इसके हार्डवेयर की पतले मोबाइल डिवाइस में फिट होने की गुंजाइश कम है।
गूगल और एप्पल ने दूरसंचार विभाग से इसको लेकर सामने आने वाली चुनौतियों को सामने रखा है। दोनों दिग्गज कंपनियों का कहना है कि मौजूदा 4G और 5G मोबाइल नेटवर्क के साथ सैटेलाइट कम्युनिकेशन को पेयर करना यूजर्स के अनुभव पर असर डाल सकता है।
जल्द शुरू होगी सैटेलाइट सर्विस
दूरसंचार विभाग ने इस डायरेक्ट-टू-डिवाइस टेक्नोलॉजी को लेकर इंडस्ट्री के स्टेकहोल्डर्स से अपनी राय मांगी है, ताकि जल्द ही इसकी टेस्टिंग शुरू की जा सके। दूरसंचार विभाग भारत में सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सर्विस को इस साल लॉन्च करने की तैयारी में है। Starlink, Airtel OneWeb, Jio समेत कई कंपनियां भारत में सैटेलाइट सर्विस शुरू करने को लेकर अपनी तैयारी कर रही हैं।
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