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भारत में हर 3 में से एक PC यूजर ऑफलाइन साइबर हमलों का शिकार, बीते साल ऐसे 6.4 करोड़ हमले रोके-कैस्परस्काई

भारत में साइबर अटैक केवल ऑनलाइन नहीं ऑफलाइन स्तर पर भी पैर पसार रहा है और बीते साल ऐसे मामलों में जमकर इजाफा हुआ है। जानिए कैस्परस्काई की रिपोर्ट क्या कहती है-

Offline Cyber Attack- India TV Hindi
Image Source : FREEPIK ऑफलाइन साइबर अटैक

Offline Cyber Attack: भारत में ऑनलाइन साइबर अटैक के खतरों की खबरें लगातार आती रहती हैं और साइबर हमलों की सूची में भारत का नाम का काफी ऊपर है। हालांकि अब एक ऐसी रिपोर्ट आई है जो ये बताती है कि केवल ऑनलाइन नहीं बल्कि ऑफलाइन साइबर हमले भी भारत में जमकर हो रहे हैं। इंटरनेट से कटे होने का मतलब यह कतई नहीं है कि आपका कंप्यूटर सुरक्षित है। भारत में साल 2025 के दौरान हर तीन में से एक निजी कंप्यूटर यानी पर्सनल कंप्यूटर (PC) यूजर्स लोकल स्तर पर होने वाले 'ऑफलाइन' साइबर हमलों का निशाना बना। साइबर सेफ्टी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी कैस्परस्काई ने मंगलवार को जारी अपनी एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी।

2025 में भारत में 6.46 करोड़ से ज्यादा साइबर घटनाएं रोकीं गई- कैस्परस्काई

कंपनी ने बताया कि उसने जनवरी से दिसंबर 2025 के बीच भारत में 6.46 करोड़ से अधिक स्थानीय साइबर घटनाओं का पता लगाया और उन्हें रोका। ये हमले मुख्य रूप से यूएसबी और पेनड्राइव जैसे बाहरी डिवाइसेज के जरिये किए गए। इन स्थानीय साइबर खतरों के कारण भारत दुनिया के टॉप 80 सबसे ज्यादा प्रभावित देशों की सूची में शामिल हो गया है। 

देश में 29.8 परसेंट यूजर्स ऑफलाइन खतरों की चपेट में

कैस्परस्काई सिक्योरिटी नेटवर्क के आंकड़ों के मुताबिक देश में 29.8 परसेंट यूजर्स इन ऑफलाइन खतरों की चपेट में आए हैं। इनमें 'वर्म्स' या खुद को फैलाने वाले घातक प्रोग्राम और 'फाइल वायरस' के जरिये होने वाले हमले सबसे अधिक रहे। एशिया पैसिफिक क्षेत्र के लिए कैस्परस्काई के मैनेजिंग डायरेक्टर एड्रियन हिया ने कहा, "2025 में हमारे रिसर्चर्स ने पाया कि हमलावर मैलवेयर डाउनलोड कराने के लिए माइक्रोसॉफ्ट टीम्स और गूगल ड्राइव जैसे लोकप्रिय टूल की नकल कर रहे हैं, ताकि यूजर्स की बैंकिंग जानकारी और संवेदनशील पर्सनल इंफॉर्मेंशन चुराई जा सके।" 

स्पाइवेयर सॉफ्टवेयर की घटनाओं में भी 51 परसेंट की भारी बढ़ोतरी

ग्लोबल स्तर पर पासवर्ड चुराने वाले यानी गोपनीय जानकारी उड़ाने वाले खतरों में 59 परसेंट की बढ़ोतरी हुई है। वहीं जासूसी करने वाले 'स्पाइवेयर' यानी चुपके से निगरानी रखने वाले सॉफ्टवेयर की घटनाओं में भी 51 परसेंट की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। एड्रियन हिया ने विशेष रूप से एशिया प्रशांत क्षेत्र में उन 'मैलिशियस फाइलों' यानी घातक प्रोग्राम में भारी बढ़ोतरी की बात कही है, जिन्हें कंप्यूटर से गोपनीय डेटा यानी निजी जानकारी चुराने के लिए बनाया गया है।

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