भारत में एआई मॉडल ट्रेन करने के लिए देनी होगी रॉयलिटी! OpenAI, Google की बढ़ी टेंशन
भारत में एआई मॉडल को ट्रेन करने के लिए मेंडेटरी रॉयलिटी सिस्टम लागू किया जा सकता है। इसके लिए DPIIT ने साल की शुरुआत में 8 सदस्यीय कमिटी गठित की थी। इस कमिटी ने सरकार को जीरो प्राइस लाइसेंस मॉडल का अल्टर्नेटिव सुझाया है।

गूगल, ओपनएआई, माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियों को अब एआई मॉडल को ट्रेन करने के लिए भारत में रॉयलिटी देना पड़ सकता है। सरकार भारत में एआई मॉडल को ट्रेन करने के लिए कॉपीराइट कंटेंट का इस्तेमाल करने पर रॉयलिटी लगाने वाली है। इसके लिए डिपार्टमेंट ऑफ प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड (DPIIT) कमिटी ने मेंडेटरी रॉयलिटी सिस्टम लाने की प्रस्ताव दिया है। इसके लिए फ्रेमवर्क बनाया जा रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, इसके लिए DPIIT ने 28 अप्रैल 2025 को एक आठ सदस्यीय कमिटी तैयार की गई थी, जो मौजूदा कानून के दायरे में जेनरेटिव एआई के मामलों को लेकर जरूरत पड़ने पर रेकोमेंडेशन दे सके। इसमें जेनरेटिव एआई मॉडल बनाने वाली कंपनियों को यूजर्स के टेक्स्ट और वीडियो डेटा का इस्तेमाल बिना अनुमति या अनुमति के ट्रेनिंग के लिए यूज करने को लेकर रॉयलिटी सिस्टम बनाने का सुझाव दिया गया है। अगले 30 दिनों में इस सुझाव पर विचार किया जाएगा।
कमिटी ने दिए ये सुझाव
कमिटी ने जीरो प्राइस लाइसेंस मॉडल सिस्टम को रिजेक्ट करते हुए हम्यून क्रिएटिविटी पर इंसेटिव देने का सुझाव दिया है, जो एआई मॉडल ट्रेनिंग के लिए मेंडेटरी रॉयलिटी सिस्टम बनाने पर जोर देगा। जीरो प्राइस लाइसेंस के अल्टर्नेटिव का सुझाव देते हुए कमिटी ने एक हाइब्रिट मॉडल का प्रस्ताव दिया है, जिसमें
- एआई डेवलपर्स को एआई मॉडल को ट्रेन करने के लिए सभी कॉपीराइट कंटेंट को कानूनी तरीके से एक्सेस करने के लिए ब्लैंकेट लाइसेंस लेने के लिए कहा गया है।
- कॉपीराइट कंटेंट या ह्यूमन क्रिएशन पर रॉयलिटी का प्राइस तभी जारी किया जाएगा, जब ट्रेन किया गया एआई मॉडल या टूल कमर्शियली लॉन्च किया जाएगा। इसके लिए दर सरकार द्वारा बनाई गई कमिटी सेट करेगी। रॉयलिटी की दर पर ज्यूडिशियल रिव्यू किया जाएगा।
- इसके अलावा रॉयलिटी कलेक्शन और डिस्ट्रिब्यूशन के लिए एक सेंट्रलाइज्ड मैकेनिज्म बनाए जाने का प्रस्ताव है। यह सेंट्रलाइज्ड मैकेनिज्म ट्रांजेक्शन कॉस्ट, कानूनी निश्चितता और बड़े तथा छोटे एआई डेवलपर्स के लिए सपोर्ट का काम करेगा।
8 सदस्यों वाली इस कमिटी ने भारत में तेजी से बढ़ रहे जेनरेटिव एआई टूल के मार्केट की तरफ ईशारा करते हुए OpenAI के सीईओ सैम ऑल्टमैन के स्टेटमेंट को भी संदर्भ में रखा है। सैम ऑल्टमैन ने भारत को अमेरिका के बाद एआई के लिए दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मार्केट बताया था। एआई कंपनियां भारतीय यूजर्स से बड़ी मात्रा में रेवेन्यू कमा रहे हैं।
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