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IT & Tech Budget: इकोनॉमिक सर्वे में सोशल मीडिया यूज करने के लिए एज लिमिट तय करने का सुझाव

आज संसद में पेश हुए इकोनॉमिक सर्वे में देश में सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर आयु सीमा तय करने को लेकर सुझाव दिए गए हैं लेकिन भारत जैसे विशाल देश में ये कितना संभव हो पाएगा ये फिलहाल पता नहीं है।

IT And Tech Budget 2026- India TV Hindi Image Source : INDIA TV आईटी और टेक सेक्टर बजट

IT and Tech Sector Budget 2026: सरकार के इकोनॉमिक सर्वे में बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर बैन के ग्लोबल संकेतों का हवाला देते हुए कहा गया कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने के लिए उम्र आधारित सीमा पर विचार किया जाना चाहिए। साथ ही डिजिटल लत से बचने के लिए ऑनलाइन शिक्षण में भी कटौती की जानी चाहिए। संसद में पेश की गई सर्वे में कहा गया कि बच्चों की डिजिटल आदतों को सुधारने में स्कूलों की भूमिका महत्वपूर्ण है। बच्चों को हानिकारक सामग्री से बचाने के लिए शैक्षिक सामग्री तक पहुंच को सरल उपकरणों (जैसे साधारण फोन या टैबलेट) को बढ़ावा दिया जाना चाहिए

सुरक्षित डिवाइस के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जाए- इकोनॉमिक सर्वे

सर्वे के मुताबिक "उम्र आधारित पहुंच सीमा को लेकर नीतियों पर विचार किया जा सकता है, क्योंकि कम उम्र के यूजर्स अनिवार्य उपयोग और हानिकारक सामग्री के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। मंच को उम्र के सत्यापन और उम्र के अनुरूप डिफॉल्ट सेटिंग लागू करने के लिए जिम्मेदार बनाया जाना चाहिए। यह विशेष रूप से सोशल मीडिया, जुए वाले ऐप, 'ऑटो-प्ले' फीचर्स और टारगेटेड विज्ञापनों के लिए अनिवार्य होना चाहिए।" सर्वे में सुझाव दिया गया कि बढ़ती डिजिटल लत की समस्या से निपटने के लिए सुरक्षित डिवाइस के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जाए। 

ऑफलाइन शिक्षण को प्राथमिकता दी जाए- इकोनॉमिक सर्वे

इसमें कहा गया, "स्कूलों को 'डिजिटल आरोग्य पाठ्यक्रम' शुरू करना चाहिए, जिसमें स्क्रीन टाइम को लेकर जागरूकता, साइबर सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता शामिल हो। कोविड-19 के दौरान शुरू हुए ऑनलाइन शिक्षण उपकरणों पर निर्भरता को कम किया जाना चाहिए और ऑफलाइन शिक्षण को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।" 

डिजिटल लत है एक बढ़ती हुई समस्या-इकोनॉमिक सर्वे

इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 ने डिजिटल लत को एक बढ़ती हुई समस्या के रूप में पहचाना है, जो युवाओं और वयस्कों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही है। सर्वे में परिवारों को शिक्षित करने और उन्हें मोबाइल का इस्तेमाल करने की समयसीमा तय करने और साझा ऑफलाइन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। इसमें स्कूलों और सामुदायिक केंद्रों के माध्यम से अभिभावकों के लिए कार्यशालाएं आयोजित करने का आह्वान किया गया है, ताकि वे स्वस्थ सीमाएं निर्धारित करने, लत के लक्षणों को पहचानने और 'पैरेंटल कंट्रोल' टूल्स का प्रभावी ढंग से उपयोग करने का प्रशिक्षण ले सकें। 

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