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मोबाइल फोन की लत किसी नशा से कम नहीं, एक्सपर्ट्स ने किए चौंकाने वाले दावे

Mobile Phone Addiction: हाल में आई एक रिसर्च में दावा किया गया है कि मोबाइल फोन की लत किसी नशे से कम नहीं है। इसका आने वाले दिनों में प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। हमें अपने मोबाइल फोन पर बिताए जाने वाले स्क्रीन टाइम को कम करना होगा।

Mobile Phone addiction- India TV Hindi Image Source : FILE Mobile Phone addiction

Mobile Phone Addiction: मोबाइल फोन की लत किसी नशीली दवाओं से कम नहीं है। इंटरनेट गेमिंग डिसऑर्डर के नाम से 2017 में प्रकाशित एक रिसर्च में एक नया अपडेट जोड़ा गया है, जिसका निष्कर्ष चौंकाने वाला है। इस निष्कर्ष में कहा गया है कि WHO ने मोबाइल स्क्रीन अडिक्शन को एक वर्गीकृत अडीक्शन कहा है। इंसान के दिमाग पर इसका प्रभाव किसी नशीले पदार्थ के सेव की तरह ही होता है।

दिमाग पर लंबे समय तक पड़ता है प्रभाव

पहले भी ऐसे कई रिसर्च में कहा गया है कि इंटरनेट और मोबाइल गेम के आदी बच्चों के दिमाग पर इसका लंबे समय तक प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि, यह सवाल भी उठता है कि क्या केवल गेम को ही दोष दिया जाए या फिर अन्य व्यापक समस्याओं को भी देखा जाए। साल 2019 में रिसर्चर्स ने सभी स्मार्टफोन यूज डिसऑर्डर को एक साथ लाने की कोशिश की है, जिसमें इंपल्सिव, रिलेशनशिप, एक्स्ट्रावर्जन और साइबर अडिक्शन जैसे चार डायरेक्शन पर जोर दिया गया है।

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साइबर अडिक्शन को रिसर्चर्स ने ऑनलाइन गेंबलिंग, ऑनलाइन गेम, सोशल नेटवर्क और मोबाइल फोन की आदतों में तोड़ा है। Amazon India के लिए कराए गए एक हालिया स्टडी से पता चला है कि ज्यादा देर तक स्क्रीन पर समय बिताने की वजह से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ दोनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। ज्यादा देर तक मोबाइल स्क्रीन पर समय बिताने की वजह से आखों में तनाव, गर्दन में दर्द, पीठ में दर्द और वजन बढ़ने जैसी शारीरिक समस्याएं हो सकती हैं।

क्या है ट्रिगर प्वाइंट?

वहीं, ज्यादा देर तक स्क्रीन का इस्तेमाल करने पर लोगों में अकेलापन, अवसाद और मनोदशा संबंधी मानसिक विकार पाए गए। यानी सरल भाषा में कहा जाए तो फोन का ज्यादा उपयोग करने पर आपके और आपके बच्चों को नुकसान पहुंचेगा और जिसे आप जीवनशैली में गड़बड़ी मान रहे हैं, वो किसी बड़े विकार के लक्षण हो सकते हैं। आंखों पर तनाव और एकाग्रता की कमी एडीएचडी (अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर) इसका एक ट्रिगर प्वाइंट हो सकता है, जो वर्षों तक मोबाइल फोन के उपयोग से बढ़ जाती है।

अब सवाल यह है कि दिन में कितने घंटे तक मोबाइल फोन का उपयोग लत की श्रेणी में आते हैं। कुछ रिसर्चर्स का कहना है कि सप्ताह में 20 घंटे से ज्यादा मोबाइल का इस्तेमाल करना लत की श्रेणी में आएगा। हालांकि, इसका जोरदार विरोध हुआ था, जिसके बाद WHO ने घंटे तके हिसाब से लत को वर्गीकरण करने से परहेज किया। भारत की 70 प्रतिशत आबादी के पास स्मार्टफोन हैं।

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कम करना होगा स्क्रीन टाइम

पिछले दिनों पीएम नरेंद्र मोदी ने अपने परीक्षा पे चर्चा में स्क्रीनटाइम को कम करने की बात कही थी। इसमें उन्होंने परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए मोबाइल फोन के कारण होने वाली विकर्षणों पर प्रकाश डाला था। अब सवाल यह उठ रहा है कि हम ज्यादा देर तक मोबाइल फोन पर समय बिताकर क्या कोकीन जैसे नशीले पदार्थ के सेवन की तरह आदी हो रहे हैं? अगर, हां तो हमें अपने स्क्रीन टाइम को कम करना होगा और मोबाइल फोन के इस्तेमाल को सीमित करना होगा।

- IANS इनपुट के साथ

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