लखनऊ हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के चर्चित सोलर मैन्युफैक्चरिंग प्रोजेक्ट रिश्वत मामले में फैसला सुनाते हुए वरिष्ठ IAS अधिकारी अभिषेक प्रकाश और अन्य आरोपियों को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने इस मामले में दर्ज भ्रष्टाचार के केस और चार्जशीट को पूरी तरह रद्द कर दिया है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला करीब 400 करोड़ रुपये की रिश्वत की मांग से जुड़ा था, जिसमें आरोप था कि सोलर प्रोजेक्ट के आवंटन और क्रियान्वयन के बदले कमीशन मांगा गया था। इस मामले में 20 मार्च 2025 को FIR दर्ज की गई थी। इसके बाद STF (स्पेशल टास्क फोर्स) की जांच हुई और कड़ी कार्रवाई करते हुए निकांत जैन को गिरफ्तार किया गया था। निकांत जैन को अभिषेक प्रकाश का करीबी बताया गया था। STF की जांच के बाद 15 मई 2025 को चार्जशीट दाखिल की गई थी।
हाईकोर्ट का रुख
हाईकोर्ट ने इस मामले की गहन सुनवाई के बाद पाया कि BNS (भारतीय न्याय संहिता) और PC एक्ट (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) के तहत कोई अपराध नहीं बनता है। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि कमीशन मांगने के आरोप पूरी तरह से साक्ष्य विहीन पाए गए।
मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब शिकायतकर्ता ने कोर्ट में अपनी गलती मान ली। शिकायतकर्ता ने कहा कि मुख्यमंत्री से की गई शिकायत गलतफहमी के कारण दर्ज हुई थी। हाई कोर्ट ने 15 मई 2025 की चार्जशीट को कानूनन गलत मानते हुए रद्द कर दिया है।
बहाली का रास्ता साफ
इस केस के रद्द होने के बाद अब गिरफ्तार किए गए निकांत जैन को बड़ी राहत मिली है। साथ ही, वरिष्ठ अधिकारी IAS अभिषेक प्रकाश पर लगे भ्रष्टाचार के दाग धुल गए हैं। क्लीन चिट मिलने के बाद अब अभिषेक प्रकाश की सेवा में जल्द बहाली हो सकती है।
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