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लखनऊ मर्डर केस: बाप बनाना चाहते थे डॉक्टर, बेटा करना चाहता था बिजनेस, हत्या की वजह कर देगी हैरान

लखनऊ में बिजनेसमैन मानवेंद्र सिंह की हत्या उनके बेटे ने अक्षत ने इसलिए कर दी क्योंकि वह बिजनेस करना चाहता था और पिता उसे डॉक्टर बनाना चाहते थे। बेटे ने पिता का कत्ल कर शव को नीले ड्रम में छुपा दिया था। जानें इस हत्याकांड की पूरी कहानी।

लखनऊ मर्डर केस का खुलासा- India TV Hindi
Image Source : REPORTER लखनऊ मर्डर केस का खुलासा

लखनऊ के एक बडे़ बिजनेसमैन मानवेंद्र सिंह की हत्या उनके बेटे अक्षत सिंह ने कर दी। शातिर बेटे ने बेटे की हत्या कर शव को ब्लू ड्रम में डाल दिया था और गुमशुदगी की बात कर उनकी तलाश में लगा था। इस हत्याकांड का खुलासा हुआ तो सबको हैरत हुई। पिता मानवेंद्र अपने बेटे अक्षत को डॉक्टर बनाना चाहते थे, जबकि बेटा बिजनेस करना चाहता था। पुलिस ने जब जांच की तो पता चला कि पढ़ाई को लेकर पिता-पुत्र के बीच तनाव बढ़ता जा रहा था। एक दिन बेटे का तनाव इतना बढ़ गया कि उसने पिता की गोली मारकर हत्या कर दी औऱ शव को नीले ड्रम में छुपा दिया। लेकिन हत्यारे बेटे के बदलते बयान ने शक बढ़ाया और पुलिस  के सामने सच्चाई सामने आ गई।

लखनऊ के आशियाना इलाके में रहते थे बिजनेसमैन मानवेंद्र सिंह, उनकी हत्या की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे मामला परिवार के अंदरूनी खींचतान की निकलती जा रही है। पिता सफल कारोबारी थे और बेटे को डॉक्टर बनाना चाहते थे। पिता के पा चार पैथालॉजी लैब और तीन शराब की दुकानें थीं। बेटा भी पिता की ही तरह कारोबार की कमान संभालना चाहता था और इसी टकराव ने अंततः पूरे परिवार को बिखेर दिया। 

आर्थिक रूप से परिवार संपन्न था और पत्नी के निधन के बाद मानवेंद्र अपने बेटे अक्षत और बेटी कृति के साथ रहते थे।मानवेंद्र की सबसे बड़ी ख्वाहिश थी कि बेटा डॉक्टर बने। अक्षत ने 12वीं की पढ़ाई प्रतिष्ठित लामार्ट स्कूल से की और कोचिंग संस्थान से नीट की तैयारी भी किया था। उसने दो बार परीक्षा भी दी थी लेकिन सफल नहीं हो सका। इसी के बाद तनाव बढ़ता जा रहा था। उसके बाद वह पैथोलॉजी लैब और दुकानों के कामकाज में दिलचस्पी लेता था। पिता पुत्र के बीच उभरा मतभेद धीरे-धीरे बहस और फिर विवाद में बदल गया।

चार महीने पहले मानवेंद्र के घर से कीमती गहने चोरी हो गए थे जिसके बाद पता चला कि जेवर और पैसे उसने ही चुराए थे। इसके बाद पिता अक्षत की गतिविधियों पर नजर रखने लगे थे। 20 फरवरी को पिता-पुत्र के बीच विवाद हुआ था। अक्षत ने लाइसेंसी राइफल से पिता को गोली मार दी। मानवेंद्र की मौके पर ही मौत हो गई। गोली की आवाज सुनकर बेटी दौड़ी, लेकिन सामने जो देखा, उससे सन्न रह गई। हत्या के बाद अक्षत ने शव को तीसरी मंजिल से घसीटकर नीचे लाया। वह बाजार से आरी खरीदकर लाया, दोनों हाथ पैर काटे। टुकड़ों को कार में भरकर पारा के सदरौना इलाके में फेंक आया। धड़ को ठिकाने लगाने में नाकाम रहा तो नीला ड्रम खरीदकर उसमें भर दिया। अक्षत ने कहानी सुनाई कि पापा दिल्ली गए हैं, मोबाइल बंद हैष जब पुलिस ने दोबारा पूछताछ की, तो बयान बदलने लगा और जब सख्ती से पूछताछ हुई तो मामले का खुलासा हुआ