प्रयागराज: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि एक महिला अपने स्त्रीधन की पूर्ण रूप से मालकिन होती है और उसे अपने आभूषण या संपत्ति लेने के लिए आपराधिक विश्वासघात के मामले में आरोपी नहीं बनाया जा सकता। अदालत ने अनामिका तिवारी और 4 अन्य लोगों की याचिका स्वीकार करते हुए उनके खिलाफ जारी समन और आपराधिक मुकदमे को रद्द कर दिया। जस्टिस चवन प्रकाश ने अपने हालिया आदेश में कहा कि शादी के समय महिला को जो संपत्ति दी जाती है, वह उसका स्त्रीधन होता है और यह पति-पत्नी की संयुक्त संपत्ति नहीं बनती।
'जरूरत पड़ने पर पति इस्तेमाल कर सकता है'
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पत्नी को इस संपत्ति का अपनी इच्छा से उपयोग या निस्तारण करने का पूरा अधिकार है। हालांकि, जरूरत पड़ने पर पति इसका इस्तेमाल कर सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, याचिकाकर्ता महिला की शादी अप्रैल 2012 में हुई थी। शादी के बाद उसने अपने पति और ससुराल पक्ष के खिलाफ दहेज की मांग को लेकर प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इस मामले में दिसंबर 2018 में आरोप पत्र दाखिल किया गया। इसके बाद महिला के पति ने एक अलग शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि सितंबर 2018 में उसकी पत्नी और अन्य लोग उसके घर में घुसे और 6400 रुपये नकद, करीब 1.5 लाख रुपये के गहने और कुछ घरेलू सामान ले गए।
'धारा 406 के तहत कोई अपराध नहीं बनता'
पति की शिकायत और गवाहों के आधार पर मजिस्ट्रेट ने महिला और उसके परिजनों को मुकदमे का सामना करने के लिए समन जारी किया था। इसी समन को चुनौती देते हुए महिला ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। हाईकोर्ट ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 405 और 406 की व्याख्या करते हुए कहा कि अगर किसी व्यक्ति को सौंपी गई संपत्ति का वह दुरुपयोग करता है, तभी आपराधिक विश्वासघात का मामला बनता है। लेकिन इस मामले में अदालत ने पाया कि पत्नी अपने स्त्रीधन की खुद मालिक है। इसलिए अपने ही आभूषण या संपत्ति को लेने पर उसके खिलाफ धारा 406 के तहत कोई अपराध नहीं बनता।