Viral Video : बेंगलुरु के मौसम पर उस समय सवाल उठने लगे जब एक कंटेंट क्रिएटर ने एक वीडियो शेयर किया। इस वीडिरे को लेकर दावा किया गया कि धूप में क्रेयॉन पिघल रहे हैं। उन्होंने शहर की अभूतपूर्व गर्मी पर हैरानी जताते हुए पूछा कि क्या तापमान इतना बढ़ गया है कि बाहर अंडा पकाया जा सके। इस वीडियो ने जलवायु परिवर्तन और भारत के इस खूबसूरत शहर के तेजी से बदलते पर्यावरण पर एक व्यापक बहस छेड़ दी है।
इंस्टाग्राम पर शेयर किया वीडियो
इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर geetha_shree_nagaraaj नामक हैंडल से शेयर किया गया है। वीडियो पर लिखा है कि, 'दोस्तों, पहली बार इस तरह की गर्मी का अनुभव कर रही हूं! क्या आपको लगता है कि मुझे अपनी मेज पर ही ऑमलेट तलना चाहिए?' वीडियो की शुरुआत में एक टेक्स्ट आता है जिसमें लिखा है, 'आपको विश्वास नहीं होगा कि बेंगलुरु में इतनी गर्मी पड़ रही है!!' इसके बाद वीडियो में उनकी हैरान करने वाली प्रतिक्रिया दिखाई देती है। अगले दृश्य में, वह पिघलते हुए प्रतीत होने वाले क्रेयॉन से भरी एक ट्रे को रिकॉर्ड करके अपने कथन का अर्थ दर्शाती है। वह कहती हैं कि, 'बेंगलुरु में मैंने अपने पूरे जीवन में ऐसा कभी नहीं देखा!' वह ट्रे को हिलाते हुए कहती है, 'हे भगवान, क्रेयॉन पिघल रहे हैं!' वह वीडियो के अंत में एक सवाल पूछती है: क्या वह इस गर्मी का इस्तेमाल अंडा पकाने के लिए कर सकती है?
यूजर्स ने दी प्रतिक्रिया
एक व्यक्ति ने सुझाव दिया, 'आइए हम सब अपने घर के सामने या छत पर पेड़ लगाना शुरू करें ताकि इस स्थिति को संतुलित किया जा सके।' गीता नागराज ने सहमति जताते हुए कहा, 'हां, बिल्कुल।' दूसरे ने कहा, 'लेकिन बेंगलुरु ही एकमात्र ऐसा शहर है जहां लोग चिलचिलाती धूप में बाहर निकलने की हिम्मत कर सकते हैं। क्या आप किसी और शहर में इसकी कल्पना कर सकते हैं? दिल्ली? चेन्नई?? मुंबई??' कंटेंट क्रिएटर ने जवाब दिया, 'अरे नहीं। हां, हां, इस गर्मी में भी बाहर निकलना संभव है!' एक तीसरे यूजर ने लिखा, 'आप लोग आरओ वॉटर पाने के नाम पर इतना पानी बर्बाद करते हैं, जबकि इसे रीसायकल करना चाहिए। अब पानी की कमी चरम स्तर पर पहुँचने वाली है, इसके लिए तैयार हो जाइए।' चौथे यूजर ने लिखा, 'ऑमलेट रील का इंतजार कर रहा हूं।' गीता नागराज ने जवाब दिया, 'मुझे लगता है मैंने जल्दबाजी में फैसला ले लिया; इससे मेरी आईकिया की मेज खराब हो जाएगी।'
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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