भारतीय ट्रेनों को चलने के लिए कितना डीजल चाहिए होता है, माइलेज सुनकर चौंकेंगे जरूर; सफर से पहले जान लें
Railway Interesting Facts : सोशल मीडिया पर आपने भारतीय रेलवे से जुड़े अनोखे और अतरंगी फैक्ट्स पढ़े होंगे। आज हम आपको बताएंगे कि, भारतीय ट्रेनों को चलने में कितना डीजल चाहिए होता है ?
Railway Interesting Facts : भारतीय रेलवे के वर्ल्ड रिकॉर्ड्स को देखकर दुनिया भी अचंभित है। लाखों यात्रियों को सफर कराने से लेकर भारतीय रेलवे के कुशल संचालन तक कई ऐसी चीजें हैं जिनकी चर्चा में विदेशों में भी खूब होती है। इन्हीं खूबियों के दम पर भारतीय रेलवे वैश्विक पटल पर एक नई पहचान बना चुका है। हम लोग भी जब ट्रेन से सफर करते हैं तो कई ऐसी चीजों पर नजर पड़ती है जिनमें हाल के कुछ वर्षों में परिवर्तन आया है। हालांकि, रेलवे और ट्रेनों की कुछ बातों हम लोग आज भी अन्जान हैं। इन्हीं में से एक चीज ट्रेन का माइलेज भी है। क्या आपको पता है कि, सुपरफास्ट और पैसेंजर ट्रेनों को भारतीय ट्रेनों को चलने के लिए कितना डीजल चाहिए होता है ? संक्षेप में कहें तो क्या आपको ट्रेनों का माइलेज पता है ? यदि आपको नहीं मालूम है तो आज हम आपको इसी का जवाब देने वाले हैं।
भारतीय ट्रेनों के कुछ नए रिकॉर्ड
यदि आप जानना चाहते हैं कि, भारतीय रेलवे हाल ही में कौन-कौन से रिकॉर्ड (Indian Railway Achievements) बनाए हैं तो इस प्रकार आसानी से समझ सकते हैं :
- भारतीय रेल के लिए रिकॉर्ड 2.93 लाख करोड़ रूपए का पूंजीगत व्यय
- 35,000-किमी नई पटरियों का निर्माण, 47,000 किमी विद्युतीकरण और ब्रॉड गेज नेटवर्क का 99.5 प्रतिशत से अधिक विद्युतीकरण
- वंदे भारत स्लीपर (Vande Bharat Sleeper) और चेयर कार ट्रेनों, अमृत भारत (Amrit Bharat Trains) और नमो भारत ट्रेनों (Namo Bharat Trains) का निर्माण तथा वैगनों की रिकॉर्ड संख्या में आपूर्ति
- पर्यावरण और जलवायु प्रतिबद्धताओं के अनुरूप कार्य का निष्पादन
- सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोरों को ‘ग्रोथ कनेक्टर्स’ के रूप में विकसित करने की घोषणा (मुंबई–पुणे, पुणे–हैदराबाद, हैदराबाद–बेंगलुरु, हैदराबाद–चेन्नई, चेन्नई–बेंगलुरु, दिल्ली–वाराणसी और वाराणसी–सिलीगुड़ी)
भारत में ट्रेनों का माइलेज
इंस्टाग्राम पर @laughingcolours नामक हैंडल से एक पोस्ट में ट्रेनों के माइलेज के बारे में बताया गया है। इसके कैप्शन में लिखा है कि, 'भारतीय रेलवे के डीजल इंजन एक लीटर ईंधन में लगभग 4 से 5 किलोमीटर की दूरी तय कर सकते हैं। यह माइलेज ट्रेन के वजन और गति जैसे कारकों पर निर्भर करता है, और ईंधन दक्षता बढ़ाने और समग्र परिचालन लागत को कम करने के लिए लगातार सुधार किए जा रहे हैं।'
सुपरफास्ट और पैसेंजर ट्रेनों का माइलेज
रिपोर्ट्स के मुताबिक, उदाहरणार्थ- 12 डिब्बों वाली एक यात्री ट्रेन को एक किलोमीटर की दूरी तय करने के लिए केवल 6 लीटर फ्यूल चाहिए होता है। इसी प्रकार 24 डिब्बों वाली एक सुपरफास्ट ट्रेन भी एक किलोमीटर की दूरी तय करने के लिए 6 लीटर फ्यूल की खपत करती है। 12 डिब्बों वाली एक एक्सप्रेस ट्रेन प्रति किलोमीटर केवल 4.5 लीटर फ्यूल की आवश्यकता होती है। ट्रेन में डिब्बों या डिब्बों की संख्या उसकी माइलेज को काफी हद तक प्रभावित करती है। कम डिब्बों वाली ट्रेनें इंजन पर कम भार डालती हैं, जिसके परिणामस्वरूप ईंधन की खपत कम होती है। इसके अलावा, ट्रेन का प्रकार भी उसकी ईंधन दक्षता को प्रभावित करता है। बताते हैं कि, यात्री ट्रेनें एक्सप्रेस या सुपरफास्ट ट्रेनों की तुलना में अधिक तेजी से फ्यूलखर्च करती हैं। यह अंतर मार्ग में यात्री ट्रेनों द्वारा बार-बार थोड़े-थोड़े अंतराल पर रुकने के कारण होता है। बार-बार रुकने की आवश्यकता से इंजन की उच्च गति प्राप्त करने की क्षमता सीमित हो जाती है, जिससे एक्सीलरेटर और ब्रेक का अधिक उपयोग होता है। परिणामस्वरूप, ईंधन की खपत बढ़ जाती है और माइलेज कम हो जाता है। इसके विपरीत, एक्सप्रेस ट्रेनें कम स्टॉप के कारण अधिक माइलेज देती हैं क्योंकि वे लंबे समय तक एक समान गति बनाए रख सकती हैं।
ध्यान देने वाली बात
दावा किया जाता है कि, भारतीय रेलवे प्रणाली में ट्रेनों का माइलेज ट्रेन के प्रकार डिब्बों की संख्या और परिचालन आवश्यकताओं जैसे कारकों के आधार पर भिन्न होता है। इन कारकों को समझने से ट्रेनों की ईंधन दक्षता और समग्र परिचालन पर उनके प्रभाव के बारे में जानकारी मिलती है।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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