रेलवे ट्रैक पर पत्थर क्यों बिछाए जाते हैं, वजह सुनकर दिमाग घूम जाएगा; सपने में भी नहीं सोचा होगा
Railway Interesting Facts : सोशल मीडिया पर आपने रेलवे से जुड़े अनसुने पहलुओं को तो पढ़ा ही होगा। मगर क्या आपने कभी सोचा है कि,रेलवे ट्रैक पर पत्थर क्यों बिछाए जाते हैं ? आज हम आपको इसके बारे में बताएंगे।

Railway Interesting Facts : ट्रेन की पटरी के किनारे और नीचे बिछी हुई छोटी-छोटी नुकीली गिट्टियां यानी पत्थर हर यात्री ने देखे होंगे। कई बार लोग ऐसा सोचते हैं कि यह सिर्फ सजावट या ट्रैक को ऊंचा रखने के लिए है, लेकिन हकीकत काफी हैरान करने वाली है। ये गिट्टियां ट्रेन की सुरक्षा, स्थिरता और लंबे समय तक चलने के लिए कई महत्वपूर्ण काम करती हैं। वजह सुनकर दिमाग घूम जाएगा क्योंकि ये पत्थर ट्रेन के भारी वजन (लाखों किलो) को संभालते हैं, पानी निकालते हैं, कंपन सोखते हैं और पटरियों को फिसलने से बचाते हैं-ऐसा कुछ जो सपने में भी नहीं सोचा होगा।
रेलवे ट्रैक पर पत्थरों का काम
रेलवे ट्रैक पर बिछे पत्थरों का क्या काम होता है इसके बारे में कई रिपोर्ट्स में बताया गया है। उन रिपोर्ट्स के मुताबिक, पत्थरों के काम के संदर्भ में इस तरह समझा जा सकता है:
- भार वितरण
- ड्रेनेज
- स्थिरता और लेटरल मूवमेंट रोकना
- कंपन और वाइब्रेशन अब्जॉर्ब करना
- वनस्पति नियंत्रण
- मेंटेनेंस में आसानी
ट्रैक पर बिछे पत्थरों के बारे में विस्तार से समझें
गौरतलब है कि, रेलवे के ट्रैक पर बिछाए जानी वाली गिट्टियां और पत्थर 6 उद्देश्य से बिछाए जाते हैं जिनके बारे में हमने आपको बताया। अब विस्तार से जानते हैं कि ये पत्थर कैसे काम करते हैं:
- भार वितरण : ट्रेन जब पटरी पर दौड़ती है तो उसका पूरा वजन रेल, स्लीपर और गिट्टी पर पड़ता है। गिट्टियां इस भारी दबाव को बड़े क्षेत्र में फैला देती हैं, जिससे नीचे की मिट्टी दबकर ट्रैक धंसने नहीं पाता। अगर गिट्टी न हो तो स्लीपर सीधे मिट्टी पर बैठेंगे और ट्रेन के वजन से ट्रैक टूट या धंस सकता है।
- ड्रेनेज : बारिश का पानी सीधे ट्रैक पर गिरता है। गिट्टियों के बीच अनियमित जगहें होने से पानी तेजी से नीचे चला जाता है और जलभराव नहीं होता। जलभराव से मिट्टी कमजोर हो जाती है और ट्रैक अस्थिर हो सकता है। भारतीय रेलवे की स्पेसिफिकेशन में भी गिट्टी को अच्छा ड्रेनेज प्रदान करने वाला बताया गया है।
- स्थिरता और लेटरल मूवमेंट रोकना : गिट्टियां नुकीली और अनियमित आकार की होती हैं, जिससे वे एक-दूसरे में फंस जाती हैं। इससे स्लीपर और पटरी अपनी जगह से नहीं हिलते। गोल पत्थर इस्तेमाल करने पर वे फिसल जाते, इसलिए नुकीले पत्थर जरूरी हैं। ट्रेन की स्पीड से होने वाले साइडवेज प्रेशर को भी ये संभालती हैं।
- वाइब्रेशन अब्जॉर्ब करना : तेज रफ्तार ट्रेन से कंपन पैदा होता है। गिट्टियां इन कंपनों को सोख लेती हैं, जिससे पटरियां नहीं फैलतीं या टूटतीं नहीं। साथ ही आसपास की इमारतों और स्लीपर को नुकसान कम होता है।
- वनस्पति नियंत्रण : गिट्टियों पर पौधे आसानी से नहीं उग पाते। अगर मिट्टी होती तो जड़ें बढ़कर ट्रैक को कमजोर कर देतीं। गिट्टियां इसे रोकती हैं।
- मेंटेनेंस में आसानी : गिट्टियां ट्रैक को ऊंचा रखती हैं और मरम्मत के दौरान आसानी से पैकिंग की जा सकती है। भारतीय रेलवे (RDSO और IRICEN स्पेसिफिकेशन) के अनुसार, गिट्टी हार्ड, ड्यूरेबल, क्यूबिकल शेप वाली और मशीन क्रश्ड होनी चाहिए। अब्रेशन वैल्यू 30% मैक्स और इम्पैक्ट वैल्यू 20% मैक्स रखा जाता है। ग्रेनाइट, क्वार्टजाइट जैसे पत्थर इस्तेमाल होते हैं। गिट्टी की मोटाई हाई-स्पीड लाइनों पर 300-500 मिमी तक हो सकती है।
आखिर यही पत्थर क्यों
सोशल मीडिया पर लोग अक्सर पूछते हैं कि “ये पत्थर क्यों?” दरअसल, ये सिर्फ पत्थर नहीं, ट्रेन की पूरी सेफ्टी सिस्टम का हिस्सा हैं। बिना इनके ट्रैक सुरक्षित नहीं रह सकता। अगली बार ट्रेन से गुजरते वक्त इन गिट्टियों को देखें और सोचें-ये छोटे-छोटे पत्थर लाखों यात्रियों की जान बचाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि गिट्टी की नियमित देखभाल ट्रैक की उम्र बढ़ाती है। भारतीय रेलवे हर साल हजारों टन नई गिट्टी बिछाती है। यह इंजीनियरिंग का अनोखा उदाहरण है जहां साधारण पत्थर इतना बड़ा काम करते हैं।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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