West Bengal की सियासत में Mamata Banerjee का उदय एक बड़े परिवर्तन के तौर पर नजर आता है। खासकर 2011 का पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव, राज्य के सियासी इतिहास में टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ, जब TMC ने लेफ्ट मोर्चे की 34 साल पुरानी सरकार का खात्मा कर दिया था।
2011 के चुनाव में TMC ने जीतीं 184 सीटें
ममता बनर्जी की पार्टी TMC ने 2011 के West Bengal Assembly Election में शानदार प्रदर्शन करते हुए राज्य की कुल 294 में से 184 सीटें जीत ली थीं। इस जीत के साथ ममता बनर्जी ने पहली बार पश्चिम बंगाल की सत्ता हासिल की और मुख्यमंत्री बनीं।
2001 में TMC ने 60 सीटों पर हासिल की थी जीत
हालांकि, इससे पहले के पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों में TMC को इतनी बड़ी कामयाबी नहीं मिली थी। 2001 के विधानसभा चुनाव में TMC ने महज 60 सीटें जीती थीं। उस वक्त TMC ने कांग्रेस के साथ गठबंधन किया था, लेकिन लेफ्ट की राज्य में मजबूत पकड़ की वजह से TMC सत्ता से दूर रही थी।
2006 में महज 30 सीटों पर सिमट गई थी TMC
इसके बाद 2006 के West Bengal Assembly Election में TMC का प्रदर्शन और कमजोर रहा था। इस चुनाव में TMC को सिर्फ 30 सीटों पर संतोष करना पड़ा था। उस वक्त CPIM की लीडरशिप वाला लेफ्ट मोर्चा मजबूत स्थिति में था और सरकार बनाने में कामयाब रहा था।
फिर 2011 में पश्चिम बंगाल में हालात पूरी तरह से बदल गए। ममता बनर्जी ने भूमि अधिग्रहण जैसे मुद्दों और जनसमर्थन के चलते 184 सीटों पर विजय पाकर इतिहास रच दिया। TMC ने इसके बाद 2016 और 2021 में भी बंगाल में अपनी पकड़ बनाए रखी और लगातार सरकार बनाई। वहीं, BJP ने भी हाल के कुछ वर्षों में पश्चिम बंगाल में अपनी ताकत बढ़ाई है, जिससे यहां का मुकाबला और दिलचस्प हो गया है।
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