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RSS ने पर्दे के पीछे जो रणनीति चलाई, उसने बदला पूरा खेल; बंगाल में BJP के 'पांडवों' ने यूं ढहाया TMC का किला

बंगाल में बीजेपी को बड़ी जीत दिलाने के लिए इस बार RSS की प्लानिंग बेहद खास रही। RSS कार्यकर्ताओं ने शांत रहकर जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने पर ध्यान दिया, बंगाल में नतीजों में इसका साफ असर दिखा।

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Image Source : PTI पश्चिम बंगाल में TMC का किला ढहाने में RSS की मेहनत काम आई।

पश्चिम बंगाल में बीजेपी जीत की उम्मीद तो कर रही थी लेकिन 200 से ज्यादा सीटें मिलेंगी, इसकी उम्मीद बीजेपी के नेताओं को भी नहीं थी। बंगाल में बीजेपी की ये टैली ही सबसे बड़ा सरप्राइज़ है। 293 सीटों में से बीजेपी ने 160 सीटें जीती हैं और 48 सीटों पर आगे चल रही है। बीजेपी की बड़ी जीत के साथ ही RSS की बूथ स्तर की मूक क्रांति भी चर्चा में है। पर्दे के पीछे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की गुप्त रणनीति ने बंगाल में पूरा खेल ही बदल दिया। 

BJP की सबसे बड़ी जीत का राज आया सामने

जहां एक ओर ममता बनर्जी और उनकी पार्टी TMC का आक्रामक चुनाव प्रचार केंद्र में रहा तो वहीं दूसरी ओर RSS कार्यकर्ताओं ने शांत रहकर जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने पर ध्यान दिया। RSS ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले बड़े पैमाने पर मतदाता जागरूकता अभियान चलाया और इसके स्वयंसेवकों ने लोगों के छोटे-छोटे समूहों के साथ राज्य के हर कोने में बैठकें कीं व उनसे इस बार निर्भीक होकर अपना वोट डालने का आग्रह किया था। RSS के स्वयंसेवकों ने जमीनी स्तर पर लोगों की नब्ज़ पर भी नजर रखी और भाजपा को ''जनता के मिजाज'' और ''प्रतिद्वंद्वियों की चाल'' के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी, जिससे पार्टी को अपनी चुनावी रणनीति को बेहतर बनाने में मदद मिली। 

RSS स्वयंसेवकों के योगदान पर बीजेपी नेता ने क्या कहा?

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस का किला ढहाने में बीजेपी को मिली सफलता में RSS स्वयंसेवकों के योगदान को स्वीकार करते हुए एक सीनियर बीजेपी नेता ने बताया, '' आरएसएस कार्यकर्ताओं ने वास्तव में बहुत मेहनत की। जमीनी स्तर पर दिन-रात काम किया और लोगों तक अपना संदेश पहुंचाया। बीजेपी ने भी इस सफलता को हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत की।'' उन्होंने बताया कि पार्टी और आरएसएस के स्वयंसेवकों ने हर स्तर पर अच्छे कॉर्डिनेशन के साथ काम किया।

RSS की 2 लाख बैठकें और जमीनी मेहनत

चुनावों के दौरान, RSS स्वयंसेवकों ने बड़े पैमाने पर मतदाता जागरूकता अभियान चलाए और राज्य भर में लोगों के छोटे समूहों के साथ लगभग 2 लाख बैठकें कीं। इन बैठकों के दौरान, लोगों को चुनाव से जुड़े मुद्दों से अवगत कराया गया और निर्भीक होकर मतदान करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। उन्हें उनकी सुरक्षा का आश्वासन दिया गया।

2021 चुनाव के बाद दिन-रात की मेहनत

सूत्रों के अनुसार, भाजपा ने पश्चिम बंगाल में 2021 के विधानसभा चुनावों के तुरंत बाद अपना जनाधार मजबूत करते हुए उसका विस्तार करना शुरू कर दिया, जिसमें पार्टी मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभरी और 2016 की तीन सीटों से बढ़कर 77 सीटें जीत लीं। आरएसएस ने भी राज्य में 2021 के विधानसभा चुनावों के तुरंत बाद भाजपा के अगले चुनावी अभियान के लिए जमीन तैयार करनी शुरू कर दी थी।

हिंसा के बाद भी RSS ने नहीं मानी हार

संघ के एक अन्य सूत्र ने कहा, ''2021 में तृणमूल की जीत के बाद पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हुई हिंसा में कई भाजपा कार्यकर्ता मारे गए। लेकिन हम रुके नहीं। हमने अपना काम जारी रखा।'' उन्होंने कहा, ''हम चुनाव बाद की हिंसा के पीड़ितों के साथ खड़े रहे और उन्हें राहत दिलाने के लिए हर संभव प्रयास किया। हमने उन्हें कानूनी सलाह, मुआवजा और उनके घरों के पुनर्निर्माण में मदद की, जिन्हें चुनाव बाद हुई हिंसा में आग के हवाले कर दिया गया था या क्षतिग्रस्त कर दिया गया था। हमने उनकी आजीविका का भी ध्यान रखा।'' 

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