वे हमारे परमाणु बम से डरते हैं, जबकि हम नहीं बना रहे; हमारा बम महाशक्तियों से 'न' कहने की ताकत है: ईरान
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका से चल रही परमाणु वार्ता के बीच बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि ईरान का असली परमाणु बम महाशक्तियों से न कहने की ताकत है।

दुबई: ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रविवार को तेहरान में एक शिखर सम्मेलन में राजनयिकों से कहा कि इस्लामिक गणराज्य ईरान की असली ताकत महाशक्तियों से "न" कहने की क्षमता में निहित है। उन्होंने अमेरिका के साथ परमाणु कार्यक्रम को लेकर चल रही बातचीत के बीच यह सख्त रुख अपनाया। बता दें कि ईरान और अमेरिका के बीच यह वार्ता जून 2025 में 12 दिनों के ईरान-इजरायल युद्ध के बाद शुरू हुई थी।
"वे हमारे परमाणु बम से डरते हैं"
अराघची ने कहा, "मैं मानता हूं कि इस्लामिक गणराज्य ईरान की शक्ति का रहस्य दूसरों के दबाव, धमकी और प्रभुत्व के सामने खड़े होने की क्षमता में है। वे हमारे परमाणु बम से डरते हैं, जबकि हम परमाणु बम नहीं बना रहे। हमारा परमाणु बम महाशक्तियों से 'न' कहने की ताकत है। इस्लामिक गणराज्य की असली शक्ति 'न' कहने की ताकत में है।" उनके "परमाणु बम" का जिक्र रेटोरिकल तरीके से किया गया था, लेकिन यह संयोग से नहीं था। बता दें कि ईरान लंबे समय से दावा करता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण है, लेकिन पश्चिमी देश और IAEA कहते हैं कि 2003 तक तेहरान के पास संगठित सैन्य परमाणु कार्यक्रम था।
ईरान कर रहा परमाणु बम बनाने को यूरेनियम संवर्धन
अमेरिका समेत पश्चिमी देशों का दावा है कि ईरान अब 60% तक यूरेनियम संवर्धन कर रहा है, जो हथियार-ग्रेड (90%) से महज एक तकनीकी कदम दूर है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने शुक्रवार को ओमान में अमेरिका के साथ अप्रत्यक्ष बातचीत को "आगे की ओर कदम" बताया था। उन्होंने X पर लिखा, "क्षेत्र के मित्र देशों की मदद से ईरान-अमेरिका बातचीत प्रगतिपूर्ण थी। संवाद हमारी शांतिपूर्ण समाधान की रणनीति है। ईरानी राष्ट्र सम्मान का सम्मान से जवाब देता है, लेकिन ताकत की भाषा बर्दाश्त नहीं करता।" अराघची के इस बयान से साफ है कि ईरान यूरेनियम संवर्धन के अधिकार पर अडिग है, जो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए प्रमुख मुद्दा है।
अमेरिका ने जून में किया था ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला
ट्रंप ने जून में ईरानी परमाणु स्थलों पर बमबारी की थी। इसमें उसके 3 परमाणु ठिकाने नष्ट हो गए थे। अब अमेरिका ने ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए अरब सागर में एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन, जहाज और युद्धक विमान तैनात किए हैं। शुक्रवार की बातचीत के दौरान सेंट्रल कमांड प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर भी ओमान में मौजूद थे। बाद में वे अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जारेड कुश्नर के साथ कैरियर पर गए।
ट्रंप ने कहा-ईरान को डील की जल्दी
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का कहना है कि ईरान को डील की जल्दी है, जबकि अभी आगे और वार्ता बाकी है। वहीं अराघची ने पिछले साल की बातचीत के दौरान अमेरिकी हमले का जिक्र करते हुए कहा, "अगर आप बातचीत में पीछे हटते हैं, तो यह स्पष्ट नहीं कि कहां तक जाएगा।" उन्होंने चेतावनी दी कि दबाव में झुकना ईरान के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। वहीं ट्रंप ने शुक्रवार के बाद कहा था, "ईरान को लगता है कि उन्हें बहुत जल्दी डील करनी है-और उन्हें करनी भी चाहिए... लेकिन अभी दूसरी दौर की बातचीत कब और कहां होगी, यह स्पष्ट नहीं है। ईरान के अंदरूनी विरोध प्रदर्शनों और क्षेत्रीय तनाव के बीच बातचीत की राह चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
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