अमेरिका अगले कुछ हफ्तों में ईरान पर करने वाला है अटैक, पूरी है सैन्य तैयारी: रिपोर्ट
अमेरिका ईरान पर हमला करने वाला है और यह अटैक जल्द ही हो सकता है। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान पर अमेरिका का हमला वेनेज़ुएला की तरह नहीं होगा। यह हफ्तों तक चलने वाली सैन्य कार्रवाई होगी।
America-Iran Tensions: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बना हुआ है और ज्यादातर अमेरिकी नागरिक समझते हैं कि अमेरिका ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई के करीब पहुंच गया है। Axios की एक नई रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि ईरान में कोई भी अमेरिकी मिलिट्री ऑपरेशन छोटे-मोटे टारगेटेड हमले की बजाय 'बहुत बड़ा और हफ्तों तक चलने वाला अभियान' होगा। यह सैन्य अभियान पिछले महीने वेनेज़ुएला में हुई कार्रवाई से कहीं अधिक घातक और गंभीर होगा।
सैन्य कार्रवाई की 90 फीसदी संभावना
रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन दो-तरफा रुख अपना रहा है। एक तरफ न्यूक्लियर समझौते को लेकर बातचीत जारी है, वहीं दूसरी तरफ क्षेत्र में भारी सैन्य तैनाती भी की जा रही है। ट्रंप के एक सलाहकार ने Axios को बताया, "बॉस तंग आ चुके हैं। उनके आसपास कुछ लोग ईरान के साथ युद्ध के खिलाफ चेतावनी दे रहे हैं, लेकिन मुझे लगता है कि अगले कुछ हफ्तों में काइनेटिक एक्शन (सैन्य कार्रवाई) की 90 फीसदी संभावना है।"
अमेरिका और इजरायल का संयुक्त अभियान
यह संभावित ऑपरेशन अमेरिका और इजरायल का संयुक्त अभियान हो सकता है, जो जून 2025 में ईरान के खिलाफ चले 12 दिन के हमले से भी बड़ा और व्यापक होगा। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि ऐसा कोई बड़ा युद्ध ट्रंप की बाकी प्रेसीडेंसी पर गहरा असर डाल सकता है, लेकिन कांग्रेस और सार्वजनिक बहस में इस पर अभी बहुत कम चर्चा हो रही है। जनवरी 2026 में ट्रंप ने ईरान में प्रदर्शनकारियों पर हिंसक कार्रवाई और न्यूक्लियर प्रोग्राम के बढ़ते खतरे के बीच मिलिट्री हमले को लगभग मंजूरी दे दी थी, लेकिन अंत में हमला टल गया था। प्रशासन ने तब से डिप्लोमेसी और मिलिट्री तैयारी दोनों को साथ-साथ चलाया है, ताकि ईरान को डील ना होने पर क्या हो सकता है, इसका अंदाजा हो।
बातचीत से बन रही बात?
मंगलवार को ट्रंप के सलाहकार जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ ने जिनेवा में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से करीब 3 घंटे की बैठक की। दोनों पक्षों ने प्रोग्रेस होने की बात कही लेकिन Axios के सूत्रों के मुताबिक बातचीत में 'गैप' अभी भी बहुत बड़े हैं और अमेरिकी अधिकारी डील के सफल होने की ज्यादा उम्मीद नहीं रख रहे हैं। वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस ने फॉक्स न्यूज को बताया कि ट्रंप ने कुछ 'रेड लाइन' तय की हैं, जिन्हें ईरान मानने को तैयार नहीं दिख रहा।
अमेरिका बढ़ा रहा है सैन्य ताकत
इस बीच अमेरिकी सेना ईरान के आसपास अपनी एयर और नेवल ताकत लगातार बढ़ा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 24 घंटों में F-35, F-22 और F-16 समेत 50 से ज्यादा फाइटर जेट पश्चिम एशिया पहुंच चुके हैं। जनवरी के अंत में USS अब्राहम लिंकन एयरक्राफ्ट कैरियर अरब सागर में तैनात किया गया था। फरवरी के पहले हफ्ते में जॉर्डन के मुवफ्फक साल्टी एयर बेस पर दर्जन भर F-15 जेट, MQ-9 रीपर ड्रोन और A-10C थंडरबोल्ट II अटैक एयरक्राफ्ट पहुंचे। सैटेलाइट इमेजरी से पता चला कि गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर USS डेल्बर्ट डी ब्लैक स्वेज कैनाल से लाल सागर की ओर जा रहा था। क्षेत्र में MQ-4C ट्राइटन सर्विलांस ड्रोन, E-11A कम्युनिकेशन एयरक्राफ्ट, P-8 पोसाइडन और E-3G सेंट्री जैसे कई टोही प्लेन पहले से मौजूद हैं।
इजरायली सेना भी कर रही तैयारी
अमेरिका ने क्षेत्र में दूसरा एयरक्राफ्ट कैरियर भी भेजा है। अमेरिकी अधिकारियों ने ईरान को दो हफ्तों के अंदर विस्तृत प्रपोजल पेश करने को कहा है। पिछले साल जून में भी ट्रंप ने दो हफ्ते की डेडलाइन दी थी, लेकिन तीन दिन बाद ही हमला हो गया था। इजरायली अधिकारियों का कहना है कि उनकी सरकार युद्ध की तैयारी कर रही है।
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