हमलों में बढ़ोतरी और चुनाव हैं नजदीक, जानें बांग्लादेश में हिंदुओं को किस बात का सता रहा डर
बांग्लादेश में हिंदुओं को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। हाल में कई ऐसी हिंसक घटनाएं हुई हैं जिससे हिंदू समुदाय के लोग डरे हुए हैं। अब चुनाव से पहले यह डर और बढ़ गया है। चलिए जानते हैं कि इसके पीछे क्या वजह है।

Bangladesh Fear In Hindu Minority: बांग्लादेश में हिंदू सुरक्षित नहीं हैं। अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमलों की वजह से लोग डरे हुए हैं, खासकर ऐसे समय पर जब चुनाव बेहद नजदीक हैं। दिसंबर 2025 में 27 साल के हिंदू युवक दीपू चंद्र दास पर उनके मुस्लिम सहकर्मियों ने पैगंबर मुहम्मद के बारे में अपमानजनक टिप्पणी करने का आरोप लगाया था। इस आरोप के बाद उनके कार्यस्थल पर हिंसक भीड़ जमा हो गई। भीड़ ने दास को जमकर पीटा, पेड़ से लटका दिया और फिर आग लगा दी। यह घटना बांग्लादेश के मैमनसिंह जिले में 18 दिसंबर 2025 को हुई थी। पुलिस ने बताया कि लगभग एक दर्जन लोगों को गिरफ्तार किया गया है और अंतरिम सरकार ने जांच के आदेश दिए हैं। हालांकि, मानवाधिकार संगठनों और हिंदू नेताओं का कहना है कि यह हत्या कोई अलग-थलग घटना नहीं है।
अल्पसंख्यकों पर तेज हुए हमले
शेख हसीना की सरकार के अगस्त 2024 में उखाड़ फेंके जाने के बाद से अल्पसंख्यकों पर हमलों में तेजी आई है। बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद ने अगस्त 2024 से अब तक 2,000 से अधिक सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं का दावा किया है, जिनमें कम से कम 61 हत्याएं, महिलाओं के खिलाफ 28 हिंसा की घटनाएं (बलात्कार सहित) और 95 पूजा स्थलों पर हमले शामिल हैं।
'अस्तित्व का है संकट'
ढाका में रहने वाले हिंदू मानवाधिकार कार्यकर्ता रंजन कर्माकर ने कहा, "अब कोई भी सुरक्षित महसूस नहीं करता। हर कोई डरा हुआ है।" उन्होंने कहा कि सजा का डर खत्म हो चुका है, लगभग हर हफ्ते होने वाली घटनाओं से हिंदू समुदाय पर कुछ इलाकों में अस्तित्व के संकट मंडरा रहा है।
इस वजह से असुरक्षित महसूस कर रहे हैं हिंदू
बांग्लादेश में हिंदू आबादी लगभग 8 प्रतिशत (करीब 1.31 करोड़) है, जबकि मुस्लिम 91 फीसदी हैं। हिंदुओं को अक्सर शेख हसीना की अवामी लीग से जुड़ा माना जाता रहा है, जिसके कारण अब वो अधिक असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। 12 फरवरी 2026 को होने वाले चुनाव से पहले ग्रामीण इलाकों में हमलों का एक पैटर्न दिख रहा है, जो अल्पसंख्यकों की वोटिंग को प्रभावित कर सकता है।
इस्लामी पार्टियों का उभार
इस बीच, जमात-ए-इस्लामी जैसी इस्लामी पार्टियां राजनीतिक रूप से फिर से उभर रही हैं। उन्होंने अपनी छवि सुधारने की कोशिश की है, जैसे हिंदू प्रतिभागियों वाली रैलियां और एक हिंदू नेता को उम्मीदवार बनाना, लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि ये कदम ज्यादातर प्रतीकात्मक हैं। घटना ने भारत-बांग्लादेश संबंधों पर भी असर डाला है। भारत ने अल्पसंख्यकों पर बार-बार हमलों के पैटर्न की आलोचना की है, जबकि बांग्लादेश ने इसे 'भारत-विरोधी भावनाओं को भड़काने का प्रयास' बताया है। दोनों देशों में वीजा सेवाएं तक प्रभावित हुई हैं।
बांग्लादेश में बढ़ी कट्टरता
दीपू चंद्र दास के परिवार में शोक का माहौल है। उनका परिवार न्याय की मांग कर रहे हैं। मां शेफाली रानी दास का कहना है, "उन्होंने उसे पीटा, पेड़ से लटकाया और जला दिया। मैं न्याय की मांग करती हूं।" दीपू परिवार के एकमात्र कमाने वाले थे। उनकी मौत से पत्नी और मां का भविष्य संकट में पड़ गया है। दीपू के अलावा कई ऐसी घटनाएं हैं जिसने बांग्लादेश में कट्टरपंथ के उभार के संकेत दिए हैं और इसी वजह से अल्पसंख्यक समुदाय में डर का माहौल है।
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