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Hindi News विदेश यूरोप डेनमार्क में पुरातत्वविदों ने खोजा 2000 साल पुराना मंदिर, ईसा मसीह से जुड़ा लिंक

डेनमार्क में पुरातत्वविदों ने खोजा 2000 साल पुराना मंदिर, ईसा मसीह से जुड़ा लिंक

म्यूजियम मिड्टजिलैंड की खोज के दौरान डेनमार्क के सेंट्रल इलाके में एक मंदिर और किलेबंद बस्ती मिली है। इस खोज से शुरुआती यूरोपियन समाज पर रोशनी पड़ती है और उनके धार्मिक रीति-रिवाजों के बारे में पता चलता है।

2000 Year Old Iron Age Temple Discovered in Denmark- India TV Hindi Image Source : MUSEUM MIDTJYLLAND VIA FACEBOOK 2000 Year Old Iron Age Temple Discovered in Denmark

Temple Discovered In Denmark: डेनमार्क के सेंट्रल इलाके में हुई एक रोमांचक खुदाई में पुरातत्वविदों ने लगभग 2,000 साल पुराना एक मंदिर और किलेबंदी वाली बस्ती खोजी है। यह खोज म्यूजियम मिड्टजिलैंड की रिसर्च से सामने आई है और इसे हाल के दशकों की सबसे शानदार पुरातात्विक खोजों में से एक माना जा रहा है। 

आयरन एज का मिला कब्रिस्तान

हेडेगार्ड नाम की जिस जगह पर खोज हुई है वह स्कजर्न नदी के उत्तरी किनारे पर एक पहाड़ी पर बसी हुई है। यहां स्कैंडिनेविया का सबसे बड़ा आयरन एज कब्रिस्तान (लौह युग का कब्रिस्तान) मिला है। यह इलाका ईसा मसीह के जन्म के आसपास की सदी में डेनमार्क की सबसे बड़ी बस्ती भी था। 

खोज का मुख्य आकर्षण है मंदिर

किलेबंदी वाली यह बस्ती अपने सबसे बड़े आकार में करीब 4 हेक्टेयर (लगभग 40,000 वर्ग मीटर) में फैली हुई थी और मजबूत बाड़ से घिरी हुई थी। खोज का मुख्य आकर्षण एक मंदिर है, जो लगभग 0 ईस्वी (ईसा मसीह के जन्म के समय) का है। यह बस्ती के दक्षिण-पूर्व कोने में स्थित है और इसका आकार 15 मीटर x 16 मीटर का आयताकार है।

मंदिर में थी सजावट और नक्काशी 

मंदिर के बाहर एक गहरी खाई है, जिसमें लकड़ी के गोल खंभे 30 सेमी के फासले पर लगे मिले हैं। अंदर दक्षिण की तरफ प्रवेश द्वार है, दीवारें लकड़ी के तख्तों और मिट्टी से बनी हैं। बीच में एक 2 x 2 मीटर का उठा हुआ अग्निकुंड है, जिसे खूबसूरत नक्काशी और सजावट से सजाया गया था। इससे साफ पता चलता है कि यह इमारत घरेलू इस्तेमाल के लिए नहीं, बल्कि धार्मिक काम के लिए बनी थी।

रोमन साम्राज्य से जुड़ा लिंक

म्यूजियम के इंस्पेक्टर मार्टिन विन्थर ओलेसेन ने कहा, "हेडेगार्ड में सब कुछ आम से बड़ा और अलग है, यहां कुछ भी सामान्य नहीं है।" उन्होंने मंदिर को "धार्मिक इमारत कैसी दिखती थी, इसकी पहली असली तस्वीर" बताया। यह खोज रोमन साम्राज्य के विस्तार से भी जुड़ी है। उस समय रोमन सेना जर्मनी में उत्तर की ओर बढ़ रही थी और एल्बे नदी तक पहुंच गई थी, जो जटलैंड के पास है। पुरातत्वविदों का मानना है कि इस बस्ती की किलेबंदी और दीवारें रोमन सैन्य दबाव के जवाब में बनाई गई होंगी। 

व्यापार नेटवर्क से जुड़े थे उत्तरी यूरोप के लोग

ओलेसेन ने कहा, "अचानक रोमन साम्राज्य विस्तार एक बड़ा खतरा बन गया था। ऐसे दबाव का जवाब किलेबंदी हो सकती है।" इस जगह से यह भी पता चलता है कि उस समय उत्तरी यूरोप के लोग भूमध्य सागर तक फैले अंतरराष्ट्रीय व्यापार नेटवर्क से जुड़े थे, जिसमें रोमन, सेल्टिक और अन्य प्रभाव दिखते हैं। 

सबसे पहले मिला था कब्रिस्तान

यह खोज सबसे पहले 1986 में पुरातत्वविद ओर्ला मैडसेन ने की थी, जब उन्होंने कब्रिस्तान ढूंढा था। खुदाई 1993 तक चली, फिर रुक गई। 2016 में म्यूजियम मिड्टजिलैंड ने दोबारा जांच शुरू की और 2023 की गर्मियों में बड़ी सफलता मिली। हाल की खुदाई (2025 तक) से मंदिर के बारे में और जानकारी सामने आई है। यह खोज शुरुआती यूरोपीय समाजों की धार्मिक रीतियों, शक्ति केंद्रों और व्यापार के बारे में नई रोशनी डालती है।

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