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बांग्लादेश में चुनाव के बाद काली मंदिर में हमला और तोड़फोड़, हिंदुओं ने जारी किया VIDEO

 Written By: Dharmendra Kumar Mishra
 Published : Feb 15, 2026 06:03 pm IST,  Updated : Feb 15, 2026 06:03 pm IST

बांग्लादेश में चुनाव होते ही हिंदुओं पर दोबारा हमले शुरू हो गए हैं। इस बार हिंदुओं के प्राचीन काली मंदिर को निशाना बनाया गया है, जहां मूर्तियों को तोड़फोड़ दिया गया है।

बांग्लादेश के हिंदू मंदिर में तोड़फोड़।- India TV Hindi
बांग्लादेश के हिंदू मंदिर में तोड़फोड़। Image Source : X@ITZBDHINDUS

ढाकाः बांग्लादेश में चुनाव संपन्न होते ही हिंदुओं और उनके धार्मिक स्थलों पर फिर से हमले शुरू हो गए हैं। ताजा घटना खोकशाबारी, सबुल्लिपारा (नीलफामारी-3) में हुई है, जहां काली मंदिर में स्थापित मूर्ति को अराजक तत्वों ने तोड़फोड़ दिया है। यह घटना बांग्लादेश के 13वें आम चुनाव के बाद हुई है, जहां बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने सबसे अधिक 212 सीटें जीतीं। वहीं जमात-ए-इस्लामी ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए 76 सीटें हासिल कीं। काली मंदिर में तोड़फोड़ की यह घटना नीलफामारी जिले में हुई है, जहां जमात-ए-इस्लामी ने सभी सीटें (नीलफामारी-1 से 4 तक) जीत लीं, जिसमें नीलफामारी-3 भी शामिल है। यहां ओबैदुल्लाह सलाफी (जमात-ए-इस्लामी) विजयी घोषित हुए।

जमात-ए-इस्लामी के इलाके में है मंदिर

यह हमले नीलफामारी जिले में हुई, जहां जमात-ए-इस्लामी ने सारी सीटें जीत ली हैं। चुनाव परिणामों के तुरंत बाद अल्पसंख्यक समुदाय, खासकर हिंदू में असुरक्षा की भावना बढ़ गई है। नीलफामारी जैसे उत्तरी जिलों में जमात-ए-इस्लामी का मजबूत प्रभाव है। इसलिए यहां हिंदुओं पर हमले फिर शुरू कर दिए गए हैं। हमलावरों ने खोकशाबारी गांव के सबुल्लिपारा इलाके में स्थित प्राचीन काली मंदिर को नुकसान पहुंचाया गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार, चुनाव नतीजे आने के बाद कुछ असामाजिक तत्वों ने मंदिर में तोड़फोड़ की, मूर्तियों को क्षतिग्रस्त किया, और परिसर में आग लगाने की कोशिश की। मंदिर की दीवारें टूटी हुई हैं, गर्भगृह में सामग्री बिखरी पड़ी है, और पूजा स्थल पूरी तरह से उजाड़ लग रहा है। 

भारत सीमा से सटे 51 सीटों पर जीते जमाती

नीलफामारी में अल्पसंख्यक पहले से ही असहज महसूस कर रहे हैं। भारतीय सीमा से सटे जिलों में 51 सीटों पर जमात-ए-इस्लामी की जीत के बाद हिंदुओं की चिंताएं बढ़ गई हैं। हिंदू समुदाय  बांग्लादेश की कुल आबादी का लगभग 8-12% है। अब उसको धमकियां, संपत्ति पर कब्जा और धार्मिक स्थलों पर हमलों का डर सता रहा है। कई परिवारों ने सुरक्षा के लिए पड़ोसी इलाकों में शरण ली है। यह घटना बांग्लादेश में चुनावोत्तर हिंसा का एक उदाहरण है, जहां राजनीतिक बदलाव के साथ साम्प्रदायिक तनाव बढ़ जाता है। नए सरकार को अल्पसंख्यक सुरक्षा, संक्रमणकालीन न्याय और सुलह प्रक्रिया पर तत्काल ध्यान देना होगा। ताकि ऐसी घटनाएं न हों। मंदिर की बहाली और पीड़ितों को न्याय मिलना जरूरी है, अन्यथा असुरक्षा की भावना और गहरी हो सकती है।

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