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मौसमी बदलाव ने बढ़ाया सेहत से जुड़ी किन समस्याओं का खतरा? स्वामी रामदेव से जानिए सेहतमंद जिंदगी का राज क्या है?

 Written By: Pankaj Kumar Edited By: Vanshika Saxena
 Published : Feb 15, 2026 11:09 am IST,  Updated : Feb 15, 2026 11:09 am IST

Secret to healthy life: मौसमी बदलाव सेहत से जुड़ी कई समस्याओं के खतरे को बढ़ा सकता है। आइए सेहत को मजबूत बनाए रखने के लिए स्वामी रामदेव से कुछ टिप्स के बारे में जानकारी हासिल करते हैं।

सेहत को मजबूत कैसे बनाएं?- India TV Hindi
सेहत को मजबूत कैसे बनाएं? Image Source : FREEPIK

महाशिवरात्रि, वो रात जब तप और प्रेम एक हो जाते हैं। शिव सिर्फ आराध्य नहीं हैं, ये इंसान के शरीर और मन के रीसेट बटन भी हैं। माता पार्वती उस ऊर्जा का प्रतीक हैं जो जीवन में संतुलन, सुकून और स्थिरता लाती है। फागुन का महीना चल रहा है, सर्दी की विदाई और मौसम के बदलने का दौर है और यही वो समय है जब कई लोगों की नींद का पैटर्न बिगड़ जाता है। रात में बार-बार नींद खुल जाती है, सुबह उठते ही थकान और दिनभर दिमाग का सुस्त रहना, और हेल्थ एक्सपर्ट्स इसे मौसमी अनिद्रा या फिर सीजनल एफेक्टिव डिसऑर्डर कहते हैं।

क्या कहती है स्टडी- स्टडी के मुताबिक मौसम बदलने पर हमारी बॉडी क्लॉक यानी सर्केडियन रिदम पर भी असर पड़ता है, कम धूप मिलने से सेरोटोनिन घटता है और मेलाटोनिन का बैलेंस बिगड़ जाता है। नेशनल हार्ट, लंग एंड ब्लड इंस्टीट्यूट के मुताबिक एक सेहतमंद इंसान के लिए 7-9 घंटे की नींद जरूरी है। नींद सिर्फ आराम नहीं, ये शरीर का रिपेयरिंग प्रोसेस है। जब नींद खराब होती है, तो दिमाग का फोकस और मेमोरी कमजोर होते हैं, दिल पर दबाव बढ़ता है, ब्लड शुगर कंट्रोल बिगड़ सकता है और इम्यूनिटी कम हो जाती है।

क्या है इलाज- सुबह की धूप जो शरीर में सेरोटोनिन बढ़ाकर मूड और नींद दोनों सुधारती है और जरूरत पड़े तो लाइट थेरेपी बॉडी क्लॉक को फिर से सिंक करने में मदद करती है। यही शिव का संदेश भी है, अंधेरे से उजाले की ओर, अफरातफरी से सुकून की ओर, तो इस महाशिवरात्रि अगर आपके जीवन की लय भी बिगड़ रही है, तो उसे फिर से साधिए। योगगुरु स्वामी रामदेव के मुताबिक अच्छी नींद ही सेहतमंद जिंदगी की सबसे पवित्र साधना है। गहरी नींद बॉडी का डिफेंस मजबूत बनाती है और अवचेतन अवस्था में बॉडी रिपेयर का काम शुरू करती है।

कितना जरूरी है सोना- अच्छी सेहत का नींद से सीधा संबंध है। यूरोपियन सोसाइटी ऑफ कार्डियोलॉजी की स्टडी के मुताबिक अधूरी नींद की भरपाई करना जरूरी है, इससे हार्ट प्रॉब्लम का रिस्क 20% तक कम हो सकता है। 18 घंटे नींद के बिना रहने से ब्लड प्रेशर हाई हो सकता है और दिल पर दबाव बढ़ सकता है। वहीं, 24 घंटे नींद के बिना चिड़चिड़ापन और काम से विरक्ति पैदा हो सकती है। बिना नींद के 36 घंटे रहने से एकाग्रता की कमी, फैसले लेने में दिक्कत और बिना नींद के 48 घंटे रहने से तनाव और बेचैनी, मूड खराब-गुस्सा महसूस हो सकता है। 48 घंटे से ज्यादा नींद के बिना रहने से मतिभ्रम की स्थिति, नकारात्मक सोच, देखने में दिक्कत और गलतियों की आशंका बढ़ जाती है।

डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।

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