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अमेरिका के 40 राज्यों में 'हिमयुग' जैसी ठंड की आहट, ट्रंप ने जताई भीषण विंटर स्टॉर्म की आशंका; माइनस 40 डिग्री गिर सकता है पारा

अमेरिका में हिमयुग जैसी भयानक ठंड की आहट है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्लोबल वार्मिंग पर इसका ठीकरा फोड़ा है। अमेरिका के 40 राज्यों में माइनस 40 डिग्री तक तापमान गिर सकता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप।- India TV Hindi Image Source : X@WHITEHOUSE अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप।

वाशिंगटनः अमेरिका के 40 राज्यों में हिमयुग जैसी ठंड की आहट ने पूरे देश में दहशत फैला दी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड जे. ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म (ट्रुथ सोशल) पर एक पोस्ट में अमेरिका में आने वाली रिकॉर्ड ठंड की लहर पर टिप्पणी की है। ट्रंप के इस पोस्ट को व्हाइट हाउस ने एक्स पर शेयर किया है, जिसमें अमेरिका के 40 राज्यों में भयानक कोल्ड वेव की आशंका जाहिर की गई है। 

ट्रंप ने ग्लोबल वार्मिंग को बताया वजह

राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी इस पोस्ट में लिखा है, "40 राज्यों में रिकॉर्ड तोड़ शीत लहर आने की आशंका है। ऐसा पहले कभी नहीं देखा गया। क्या पर्यावरणवादी विद्रोही कृपया समझा सकते हैं कि ग्लोबल वार्मिंग का क्या हुआ???" ट्रंप के इस पोस्ट ने अमेरिकियों के दिल में नया डर पैदा कर दिया है। ट्रंप ने इस पोस्ट के साथ अपनी एक तस्वीर भी शेयर की है, जिसमें वह लंबा और सर्दी रोकने वाला काला गाउन पहने नजर आ रहे हैं। 

माइनस 40 डिग्री तक गिर सकता है तापमान 

अमेरिका के आधे हिस्से में माइनस -40 डिग्री तक तापमान के गिरने की आशंका जाहिर की गई है। ट्रंप ने शुक्रवार को यह पोस्ट किया है, जिसे बाद में ह्वाइट हाउस की ओर से शेयर किया गया। जब अमेरिका के आधे से अधिक हिस्से में एक भयंकर विंटर स्टॉर्म और आर्कटिक जैसी ठंड की चेतावनी जारी की गई है। 


230 मिलियन लोग हो सकते हैं प्रभावित

मौसम विभाग के अनुसार इस हालात से अमेरिका में लगभग 170-230 मिलियन लोग प्रभावित हो सकते हैं। 12 से अधिक राज्यों में इमरजेंसी घोषित हो चुकी है। कई इलाकों में तापमान माइनस 30-40 डिग्री फारेनहाइट (विंड चिल के साथ) तक गिर सकता है, जिससे फ्रॉस्टबाइट, बिजली कटौती, सड़कें बंद और जानलेवा खतरा पैदा हो रहा है। दक्षिणी राज्य जैसे टेक्सास, अर्कांसस से लेकर पूर्वी तट तक भारी बर्फबारी, बर्फीली बारिश और ठंड का कहर मचा हुआ है। ट्रंप ने इस ठंड को जलवायु परिवर्तन (ग्लोबल वार्मिंग) के खिलाफ एक तंज के रूप में इस्तेमाल किया है। उन्होंने पर्यावरण कार्यकर्ताओं को “एनवायरनमेंटल इंसरेक्शनिस्ट्स” कहकर चुनौती दी है कि ग्लोबल वार्मिंग कहां गई? यह उनका पुराना स्टैंड है, जहां वे मौसमी ठंड को जलवायु परिवर्तन के सबूत के खिलाफ पेश करते हैं।

क्या कहते हैं जलवायु वैज्ञानिक

जलवायु वैज्ञानिकों का कहना है कि यह गलतफहमी है। जलवायु परिवर्तन से मौसम की चरम घटनाएं बढ़ रही हैं। पोलर वोर्टेक्स का डिसरप्शन (ध्रुवीय भंवर का विघटन) ठंडी हवाओं को दक्षिण की ओर धकेल रहा है, जिससे सामान्य से ज्यादा ठंड पड़ रही है। ग्लोबल वार्मिंग औसत तापमान बढ़ाती है, लेकिन इससे मौसम की अस्थिरता बढ़ती है। गर्मी की लहरें, बाढ़, सूखा और कभी-कभी असामान्य ठंड भी। विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि ऐसी घटनाएं जलवायु संकट का हिस्सा हैं। अमेरिका को अब तैयारी, बुनियादी ढांचे और नीतिगत बदलाव की जरूरत है, न कि व्यंग्य करने की।

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