अमेरिका में महाघोटाला! भारतीय मूल के भाइयों को 835 साल की सजा; जानें पूरा मामला
अमेरिका के पेंसिल्वेनिया में भारतीय मूल के 2 भाइयों को ठगी और धोखाधड़ी के मामले में दोषी ठहराया गया है। इन दोनों भाइयों के नाम भास्कर सवानी और अरुण सवानी है। चलिए जानते हैं कि पूरा मामला क्या है।
America Savani Brothers Fraud: पेंसिल्वेनिया के भारतीय मूल के 2 भाइयों, भास्कर सवानी और अरुण सवानी को आपराधिक साजिश में दोषी ठहराया गया है। इन पर स्वास्थ्य सेवा धोखाधड़ी, H-1B वीजा धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग, टैक्स धोखाधड़ी और अन्य कई आरोप हैं। जांच के अनुसार, दोनों भाइयों ने सवानी ग्रुप नाम से एक आपराधिक नेटवर्क चलाया, जिससे उन्होंने लाखों डॉलर की कमाई की। दोनों भाइयों ने अमेरिकी स्वास्थ्य प्रणाली की खामियों को फायदा उठाया साथ ही प्रवासियों का शोषण और ठगी की।
सवानी ब्रदर्स के सहयोगी भी पाए गए दोषी
भास्कर सवानी (60 वर्ष) पेशे से डेंटिस्ट हैं, जबकि अरुण सवानी (58 वर्ष) मुख्य रूप से वित्तीय मामलों को संभालते थे। एक फेडरल जूरी ने उन्हें रैकेटियरिंग (RICO) साजिश, वीजा धोखाधड़ी, हेल्थकेयर धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग, टैक्स फ्रॉड और अन्य अपराधों में दोषी पाया है। उनकी सहयोगी अलेक्सांड्रा ओला राडोमिक को भी रैकेटियरिंग, साजिश और हेल्थकेयर धोखाधड़ी के लिए दोषी ठहराया गया है।
कैसी की धोखाधड़ी?
स्वास्थ्य सेवा में धोखाधड़ी
दोनों भाइयों को मेडिकेड कार्यक्रम में बड़े पैमाने पर स्वास्थ्य सेवा धोखाधड़ी का दोषी पाया गया। जांचकर्ताओं ने बताया कि सवानी समूह ने अपने दंत चिकित्सालयों को मेडिकेड बीमा अनुबंधों से समाप्त किए जाने के बाद भी मेडिकेड भुगतान प्राप्त करना जारी रखा। आरोप है कि उन्होंने नॉमिनी के स्वामित्व वाले दंत चिकित्सालयों के माध्यम से ऐसा किया, जो उनकी ओर से मेडिकेड को बिल भेजते थे। अधिकारियों ने बताया कि इस योजना के परिणामस्वरूप 30 मिलियन डॉलर से अधिक के फर्जी मेडिकेड दावे किए गए।
H-1B वीजा धोखाधड़ी
सवानी भाइयों ने मुख्य रूप से भारत से विदेशी कर्मचारियों को लाने के लिए फर्जी H-1B वीजा आवेदन दाखिल किए। नौकरी मिलने के बाद इन कर्मचारियों को सैलरी का हिस्सा वापस करने और अतिरिक्त फीस देने के लिए मजबूर किया गया। यह एक तरह से प्रवासियों का शोषण और ठगी थी।
मनी लॉन्ड्रिंग और टैक्स धोखाधड़ी
धोखाधड़ी से कमाए पैसे को शेल कंपनियों और कई बैंक खातों के जरिए घुमाया गया। निजी खर्चों (जैसे कॉलेज फीस, प्रॉपर्टी टैक्स, घर के रखरखाव) को बिजनेस खर्च दिखाकर टैक्स चोरी की गई और आय पर कर का भुगतान नहीं किया गया।
फर्जी मेडिकेड बिल
जांच में यह भी पाया गया कि फर्जी मेडिकेड बिल भी बनाए गए। जांच में पता चला कि कुछ ऐसी तारीखों पर बिल जमा किए गए, जब असली दंत चिकित्सक अमेरिका से बाहर थे। फिर भी उन्होंने उसी डॉक्टर के नंबर (NPI) का इस्तेमाल करके फर्जी बिल बनाए। कई बार बिल ऐसे दंत चिकित्सकों के नाम पर जमा किए गए, जिनके पास वैध लाइसेंस या प्रमाण-पत्र ही नहीं था। इस तरह स्वास्थ्य विभाग के नियमों को बार-बार तोड़ा गया।
असुरक्षित चिकित्सा उपकरण
एक अन्य चौंकाने वाले आरोप में जांच करने वालों को पता चला कि इस ग्रुप ने ऐसे डेंटल इम्प्लांट इस्तेमाल किए, जिन पर साफ लिखा था मानव उपयोग के लिए नहीं यानी ये सिर्फ टेस्टिंग/प्रोटोटाइप थे, इंसानों में लगाने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं थे। फिर भी उन्होंने बिना मरीजों को बताए और बिना उनकी इजाजत लिए इन इम्प्लांट को लोगों के मुंह में लगा दिया। इन उपकरणों को अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन द्वारा मंजूरी नहीं दी गई थी।
कितनी हो सकती है सजा?
भास्कर सवानी को अधिकतम 420 साल और अरुण सवानी को 415 साल की जेल हो सकती है। कुल मिलाकर 835 साल। राडोमिक को अधिकतम 40 साल की सजा का सामना करना पड़ सकता है।
ऐसे सुर्खियों में आए सवानी ब्रदर्स
इस बीच यहां यह भी बता दें कि, सजा की सुनवाई जुलाई 2026 में पेंसिल्वेनिया की फेडरल अदालत में होगी। ये भाई पहले सुर्खियों में आए थे, जब उन्होंने सोशल मीडिया पर FBI डायरेक्टर काश पटेल के साथ अपनी तस्वीरें पोस्ट की थीं और उनकी नियुक्ति का जश्न मनाया था हालांकि जांच उस समय भी चल रही थी। यह मामला US Department of Justice (DOJ) की जांच से सामने आया, जिसमें कई अन्य लोग जैसे निरंजन सवानी, आमीन ढिल्लों, सुनील फिलिप और सुसान मालपार्टिडा भी शामिल थे, जिनमें से कुछ दोषी ठहराए जा चुके हैं।
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