न्यूयॉर्क: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया कि थाईलैंड और कंबोडिया के बीच हालिया घातक झड़पों के बाद अब दोनों देशों ने दोबारा सीजफायर लागू करने पर हामी भरी है। यह स्टेप उस सीजफायर को बचाने के लिए महत्वपूर्ण है, जिसको अमेरिका की मदद के बाद इसी साल लागू करवाया गया था। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करके बताया कि उन्होंने थाई प्रधानमंत्री Anutin Charnvirakul और कंबोडिया के प्रधानमंत्री Hun Manet से बात की है।
थाईलैंड-कंबोडिया में कैसे हुआ शांति समझौता
डोनाल्ड ट्रंप ने लिखा, “दोनों देश सभी फायरिंग को रोकने और उस मूल सीजफायर पर लौटने के लिए तैयार हैं, जो मेरे और मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम की सहायता से हुआ था।” अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि मलेशिया के पीएम अनवर इब्राहिम ने दोनों देशों को सीजफायर पर राजी करने में अहम रोल निभाया।
पहले भी ट्रंप ने कराया था सीजफायर
गौतलब है कि मूल सीजफायर इस साल जुलाई में मलेशिया के बीच में पड़ने और डोनाल्ड ट्रंप के दबाव के बाद हुआ था। डोनाल्ड ट्रंप ने उस समय चेताते हुए कहा था कि अगर दोनों देश सीजफायर के लिए राजी नहीं हुए तो व्यापारिक विशेषाधिकार रोके जाएंगे। इसके बाद अक्टूबर में मलेशिया में इस शांति समझौते को औपचारिक रूप मिला। हालांकि इसके बाद भी दोनों देशों के बीच प्रोपेगैंडा की जंग चलती रही और सीमावर्ती क्षेत्रों में छोटे लेवल पर हिंसा भी जारी रही।
थाईलैंड और कंबोडिया में सीमा विवाद क्यों
जान लें कि थाईलैंड और कंबोडिया के सीमा विवाद की जड़ 1907 के उस मैप में है, जिसे फ्रांसीसियों के शासनकाल में बनाया गया था। इसे थाईलैंड गलत मानता है, जबकि 1962 के अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के निर्णय में यह क्षेत्र कंबोडिया को सौंपा गया था। आज भी यह फैसला थाईलैंड के कई नागरिकों को खटकता है।
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