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अडाणी समूह का अक्षय ऊर्जा, सस्ते हाइड्रोजन के उत्पादन पर जोर, 70 अरब डॉलर निवेश का ऐलान

भारत सरकार ने साल 2030 तक अपनी ऊर्जा जरूरतों का 50 प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा से प्राप्त करने और गैर जीवाश्म ईंधन ऊर्जा क्षमता को बढ़ाकर 500 गीगावाट करने का लक्ष्य रखा है

India TV Paisa Desk Edited by: India TV Paisa Desk
Published on: November 11, 2021 22:06 IST
अक्षय ऊर्जा में...- India TV Hindi News
Photo:PTI

अक्षय ऊर्जा में अडाणी ग्रुप का  70 अरब डॉलर निवेश का ऐलान

नई दिल्ली। अरबपति कारोबारी गौतम अडानी ने बृहस्पतिवार को कहा कि उनका समूह दुनिया की सबसे बड़ी अक्षय ऊर्जा कंपनी बनने और विश्व में सबसे सस्ता हाइड्रोजन का उत्पादन करने के लिए अगले दशक के दौरान 70 अरब डॉलर का निवेश करेगा। दुनिया की सबसे बड़ी सौर ऊर्जा कंपनी अडाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (एजीईएल) ने 2030 तक 45 हजार मेगावाट अक्षय ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य रखा है। 

कंपनी 2022-23 तक प्रति वर्ष दो हजार मेगावाट सौर निर्माण क्षमता विकसित करने के लिए 20 अरब डॉलर का निवेश भी करेगी। ब्लूमबर्ग इंडिया इकोनॉमिक फोरम में बोलते हुए अडाणी समूह के संस्थापक एवं अध्यक्ष गौतम अडाणी ने कहा कि समूह अक्षय ऊर्जा को जीवाश्म ईंधन के बदले एक उपयोगी और किफायती विकल्प बनाने पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा, "वर्ष 2030 तक हम दुनिया की सबसे बड़ी अक्षय ऊर्जा कंपनी बनने की उम्मीद कर रहे है। इसे पूरा करने के लिए हम अगले एक दशक के दौरान 70 अरब डॉलर खर्च करेंगे। ऐसी कोई दूसरी कंपनी नहीं है, जिसने अभी तक संवहनीय बुनियादी ढांचे के विकास पर इतना बड़ा दांव लगाया हो।" अडाणी ने कहा, "हम दुनिया में सबसे कम लागत वाले हाइड्रोजन का उत्पादन करने के लिए बेहद मजबूत स्थिति में हैं, जो एक ऊर्जा स्रोत हो सकता है और कई उद्योगों के लिए कच्चा माल बन सकता है।" 

हाल ही में ब्रिटेन के ग्लासगो में संयुक्त राष्ट्र सीओपी-26 के राष्ट्राध्यक्ष और शासनाध्यक्ष सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने भारत का वर्ष 2070 तक शून्य उत्सर्जन का लक्ष्य सामने रखा है। इसके साथ ही उन्होने राष्ट्रीय प्रतिबद्ध योगदान (एनडीसी) के तहत साल 2030 तक गैर जीवाश्म ईंधन ऊर्जा क्षमता को 450 गीगा वाट से बढ़ाकर 500 गीगावाट करने का लक्ष्य रखा है। इसके साथ ही 2030 तक अपनी ऊर्जा जरूरतों का 50 प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा से प्राप्त करना, अब से 2030 के बीच अनुमानित कार्बन उत्सर्जन में एक अरब टन की कटौती करना और कार्बन की गहनता में 45 प्रतिशत तक कटौती करना शामिल है। निजी क्षेत्र सरकार की नीतियों की दिशा को देखते हुए ही अपने रणनीति तैयार कर रहा है। 

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