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बाबा रामदेव की हुई रुचि सोया, NCLT ने पतंजलि की 4,350 करोड़ रुपए की संशोधित बोली को किया मंजूर

 Edited By: India TV Paisa Desk
 Published : Jul 26, 2019 11:40 am IST,  Updated : Jul 26, 2019 11:42 am IST

यह मंजूरी इस बात पर निर्भर करेगी कि समाधान पेशेवर को सुनवाई की अगली तारीख एक अगस्त से पहले पतंजलि को 600 करोड़ रुपए के कोष के सही स्रोत के बारे में सूचना देनी होगी।

Finally, Ram Dev gets ownership of Ruchi Soya for Rs 4,350 cr- India TV Hindi
Finally, Ram Dev gets ownership of Ruchi Soya for Rs 4,350 cr Image Source : FINALLY, RAM DEV GETS OWN

मुंबई। एक लंबी लड़ाई के बाद आखिरकार बाबा रामदेव को रुचि सोया पर अधिकार मिल गया है। राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) ने योग गुरु बाबा रामदेव द्वारा संचालित पतंजलि आयुर्वेद की रुचि सोया के अधिग्रहण के लिए 4,350 करोड़ रुपए की संशोधित बोली को मंजूरी दे दी है। खाद्य तेल कंपनी रुचि सोया पर बैंकों का 9,345 करोड़ रुपए का बकाया है।

हालांकि, न्यायाधिकरण ने कहा कि यह मंजूरी इस बात पर निर्भर करेगी कि समाधान पेशेवर को सुनवाई की अगली तारीख एक अगस्त से पहले पतंजलि को 600 करोड़ रुपए के कोष के सही स्रोत के बारे में सूचना देनी होगी। न्यायाधिकरण ने समाधान पेशेवर से सुनवाई की अगली तारीख से पहले समूची निपटान प्रक्रिया की वास्तविक लागत का ब्योरा देने को भी कहा है।

न्यायाधिकरण ने कहा है कि समाधान पेशेवर को निर्देश दिया जाता है कि वह सुनवाई की अगली तारीख एक अगस्त से पहले कॉरपोरेट दिवाला निपटान प्रक्रिया की पूरी लागत का ब्योरा उपलब्ध कराए।

एनसीएलटी ने अपनी यह मंजूरी स्‍टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक और सिंगापुर के बैंक डीबीएस द्वारा दायर याचिका को रद्द करने के बाद दी है, जिसमें दोनों पतंजलि की इतनी कम बोली को चुनौती दी थी। रुचि सोया पर भारतीय स्‍टेट बैंक के नेतृत्‍व वाले बैंकों के समूह का कुल 9,345 करोड़ रुपए बकाया है। इसमें एसबीआई का 1800 करोड़ रुपए, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया का 816 करोड़, पंजाब नेशनल बैंक का 743 करोड़ और स्‍टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक का 608 करोड़ रुपए बकाया है। डीबीएस का 243 करोड़ रुपए का बकाया है।

इसके अलावा समाधान पेशेवर ने परिचालन ऋणदाताओं की ओर से 2716.61 करोड़ रुपए का दावा पेश किया है। एनसीएलटी ने अपने आदेश में यह स्‍पष्‍ट नहीं किया है कि परिचालन ऋणदाताओं को कितना धन मिलेगा।  

इस आदेश पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए पतंजलि आयुर्वेद के प्रबंध निदेशक आचार्य बालकृष्‍ण ने कहा कि यह एक सकारात्‍मक कदम है जो हमारे स्‍वदेशी अभियान को आगे बढ़ाने में मदद करेगा। उन्‍होंने कहा कि उनकी कंपनी रुचि सोया के इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर का उपयोग किसानों के कल्‍याण के लिए करेगी।

एनसीएलटी ने इस मामले पर सुनवाई 10 मई को पूरी कर ली थी और पतंजलि के 4,350 करोड़ रुपए की संशोधित बोली पर अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था। एनसीएलटी ने अपना आदेश इसलिए सुरक्षित रखा था क्‍योंकि उसने पतंजलि द्वारा जमा कराए गए 600 करोड़ रुपए के स्रोत के बारे में जानकारी मांगी थी। दो बार जानकारी मांगने के बाद भी पतंजलि ने इसके वास्‍तविक स्रोत की जानकारी उपलब्‍ध नहीं कराई और कहा कि उसने आंतरिक स्रोतों से इस राशि का भुगतान किया है।

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