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बैड बैंक क्‍या है और ये कैसे काम करेगा, बैंकों को क्‍या फायदा होगा जानिए ऐसे सभी सवालों के आसान जवाब

निम्नलिखित प्रश्नों के जरिये आप फंसे क़र्ज़ की परिसंपत्तियों के अधिग्रहण के लिए राष्ट्रीय परिसंपत्ति पुनर्निर्माण कंपनी लिमिटेड द्वारा जारी प्रतिभूति रसीदों के संबंध में केंद्र सरकार की गारंटी के विभिन्न पहलुओं को आसानी से समझ सकते हैं।

India TV Paisa Desk India TV Paisa Desk
Published on: September 16, 2021 19:07 IST
Frequently Asked Questions regarding Government guarantee to Bad Bank- India TV Paisa
Photo:PTI

Frequently Asked Questions regarding Government guarantee to Bad Bank

नई दिल्‍ली। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को फंसे क़र्ज़ की परिसंपत्तियों के अधिग्रहण के लिए राष्ट्रीय परिसंपत्ति पुनर्निर्माण कंपनी लिमिटेड (एनएआरसीएल) या बैड बैंक द्वारा जारी प्रतिभूति रसीदों को समर्थन देने के लिए 30,600 करोड़ रुपये की केंद्र सरकार की गारंटी को मंजूरी प्रदान की है।   

एनएआरसीएल ने आरबीआई के मौजूदा नियमों के तहत विभिन्न चरणों में लगभग 2 लाख करोड़ रुपये मूल्य के फंसे क़र्ज़ की परिसंपत्तियों के अधिग्रहण का प्रस्ताव रखा है। प्रस्ताव के तहत, 15 प्रतिशत नकद और 85 प्रतिशत प्रतिभूति रसीदों (एसआर) के माध्यम से इन परिसंपत्तियों का अधिग्रहण किया जाएगा। निम्नलिखित प्रश्‍नों के जरिये आप फंसे क़र्ज़ की परिसंपत्तियों के अधिग्रहण के लिए राष्ट्रीय परिसंपत्ति पुनर्निर्माण कंपनी लिमिटेड द्वारा जारी प्रतिभूति रसीदों के संबंध में केंद्र सरकार की गारंटी के विभिन्न पहलुओं को आसानी से समझ सकते हैं।        

राष्ट्रीय परिसंपत्ति पुनर्निर्माण कंपनी लिमिटेड (एनएआरसीएल) क्या है? इसे किसने स्थापित किया है?

एनएआरसीएल को कंपनी अधिनियम के तहत निगमित किया गया है और कंपनी ने एक परिसंपत्ति पुनर्निर्माण कंपनी (एआरसी) के रूप में लाइसेंस के लिए भारतीय रिजर्व बैंक के पास आवेदन दिया है। एनएआरसीएल की स्थापना बैंकों द्वारा फंसे क़र्ज़ की परिसंपत्तियों को समेकित करते हुए ऋण का समाधान करने के लिए की गई है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक एनएआरसीएल में 51 प्रतिशत स्वामित्व बनाए रखेंगे।

भारत ऋण समाधान कंपनी लिमिटेड (आईडीआरसीएल) क्या है? इसे किसने स्थापित किया है?

आईडीआरसीएल एक सेवा कंपनी/परिचालन इकाई है, जो परिसंपत्ति का प्रबंधन करेगी और बाजार के व्यवसाय-संबंधी विशेषज्ञों और टर्नअराउंड विशेषज्ञों को शामिल करेगी। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (पीएसबी) और सार्वजनिक वित्त संस्थान (एफआई) के पास अधिकतम 49 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी और शेष हिस्सेदारी निजी क्षेत्र के ऋणदाताओं के पास रहेगी।

वर्त्तमान में 28 एआरसी हैं, तो एनएआरसीएल-आईडीआरसीएल जैसी संरचना की आवश्यकता क्यों है?

मौजूदा एआरसी विशेष रूप से छोटे मूल्य के ऋणों के लिए फंसे क़र्ज़ की परिसंपत्तियों के समाधान में सहायक रहे हैं। आईबीसी समेत विभिन्न उपलब्ध समाधान व्यवस्था उपयोगी सिद्ध हुए है। लेकिन, पुराने एनपीए के बड़े स्टॉक को देखते हुए, अतिरिक्त विकल्पों की आवश्यकता थी। इसे ध्यान में रखते हुए केंद्रीय बजट में एनएआरसीएल-आईआरडीसीएल की घोषणा की गई थी।

सरकारी गारंटी की आवश्यकता क्यों है? 

इस तरह की समाधान व्यवस्था, जो एनपीए के पुराने बकाया मामलों का समाधान करती हैं, को आमतौर पर सरकार से समर्थन की आवश्यकता होती है। यह समर्थन विश्वसनीयता प्रदान करता है और आकस्मिक प्रतिरोध (बफर) की क्षमता प्रदान करता है। इसलिए, 30,600 करोड़ रुपये तक की भारत सरकार की गारंटी, एनएआरसीएल द्वारा जारी प्रतिभूति रसीदों (एसआर) का समर्थन करेगी। यह गारंटी 5 साल के लिए वैध होगी। गारंटी लागू होने के लिए पूर्ववर्ती शर्त, समाधान या परिसमापन होगी। गारंटी एसआर के अंकित मूल्य और वास्तविक प्राप्ति के बीच की कमी को पूरा करेगी। भारत सरकार की गारंटी एसआर की तरलता को भी बढ़ाएगी, क्योंकि ऐसे एसआर कारोबार के योग्य होंगे।

एनएआरसीएल और आईडीआरसीएल कैसे काम करेंगे?

एनएआरसीएल लीड बैंक को प्रस्ताव देकर संपत्ति का अधिग्रहण करेगी। एक बार जब एनएआरसीएल का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया जायेगा, तो आईडीआरसीएल को प्रबंधन और मूल्यवर्धन के लिए नियुक्त किया जाएगा।

इस नई संरचना से बैंकों को क्या फायदा होगा? 

यह संरचना फंसे क़र्ज़ की परिसंपत्तियों के समाधान पर त्वरित कार्रवाई को प्रोत्साहित करेगी, जिससे बेहतर मूल्य प्राप्ति में मदद मिलेगी। इस दृष्टिकोण को अपनाने से बैंकों के पास व्यापार बढ़ाने और ऋण वृद्धि पर ध्यान केंद्रित करने के लिए अतिरिक्त बैंककर्मी उपलब्ध होंगे। इन फंसे क़र्ज़ की परिसंपत्तियों और एसआर के धारकों के रूप में, बैंकों को लाभ प्राप्त होगा। इसके अलावा, यह बैंक के मूल्यांकन में सुधार लाएगा और बाजार से पूंजी जुटाने की उनकी क्षमता को बढ़ाएगा।

इसे अभी क्यों स्थापित किया जा रहा है?

दिवाला और दिवालियापन संहिता (आईबीसी), वित्तीय परिसंपत्तियों के प्रतिभूतिकरण और पुनर्निर्माण को मजबूत करना तथा प्रतिभूति ब्याज का प्रवर्तन (एसएआरएफएइएसआई) अधिनियम और ऋण वसूली न्यायाधिकरण, साथ ही बड़े मूल्य के एनपीए खातों के लिए बैंकों में फंसे क़र्ज़ की परिसंपत्ति के समाधान के लिए समर्पित प्रबंधन कंपनी (एसएएमवी) की स्थापना के द्वारा ऋण-वसूली पर अधिक ध्यान केंद्रित किया गया है। इन प्रयासों के बावजूद, बैंकों की बैलेंस शीट पर पर्याप्त मात्रा में एनपीए मौजूद हैं, क्योंकि परिसंपत्ति गुणवत्ता समीक्षा से पता चलता है कि खराब ऋणों का स्टॉक न केवल बहुत बड़ा है, बल्कि विभिन्न ऋणदाताओं के बीच बंटा हुआ है। बैंकों द्वारा उच्च स्तर के प्रावधान ने पुराने एनपीए के खिलाफ तेजी से समाधान के लिए एक अनूठा अवसर प्रस्तुत किया है।

क्या गारंटी के उपयोग किए जाने की संभावना है?

अंतर्निहित परिसंपत्तियों से प्राप्त राशि और उस परिसंपत्ति के लिए जारी एसआर के अंकित मूल्य के बीच की कमी को कवर करने के लिए सरकारी गारंटी का उपयोग किया जायेगा, जो 5 वर्षों के लिए 30,600 करोड़ रुपये की अधिकतम सीमा के अधीन होगा। चूंकि परिसंपत्तियों का एक समूह होगा, यह उम्मीद करना उचित है कि उनमें से कई मामले में प्राप्त धनराशि, अधिग्रहण लागत से अधिक होगी।

सरकार तेज और समय पर समाधान कैसे सुनिश्चित करेगी?

भारत सरकार की गारंटी पांच साल के लिए वैध होगी और गारंटी के उपयोग की शर्त समाधान या परिसमापन होगी। इसके अलावा, समाधान में देरी को हतोत्साहित करने के लिए, एनएआरसीएल को गारंटी शुल्क का भुगतान करना पड़ेगा, जो समय बीतने के साथ बढ़ता जाएगा।

एनएआरसीएल की पूंजी संरचना क्या होगी और सरकार कितना योगदान देगी?

एनएआरसीएल का पूंजीकरण बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) द्वारा इक्विटी के माध्यम से किया जाएगा। यह आवश्यकतानुसार कर्ज से भी पूंजी जुटाएगा। भारत सरकार की गारंटी शुरूआती पूंजीकरण आवश्यकताओं में कमी लाएगी।

फंसे क़र्ज़ की परिसंपत्तियों के समाधान के लिए एनएआरसीएल की रणनीति क्या होगी?

एनएआरसीएल का उद्देश्य फंसे क़र्ज़ की परिसंपत्तियों का समाधान करना है, जिनमें से प्रत्येक परिसंपत्ति का मूल्य 500 करोड़ रुपये से अधिक हो तथा इन सभी परिसंपत्तियों का कुल मूल्य लगभग 2 लाख करोड़ रुपये हो। चरण-I के तहत, लगभग 90,000 करोड़ रुपये मूल्य की परिसंपत्तियों को एनएआरसीएल को हस्तांतरित किए जाने की उम्मीद है, जबकि कम मूल्य वाली शेष परिसंपत्तियों को चरण-II में हस्तांतरित किया जाएगा।

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