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पवन हंस में हिस्सेदारी बेचने के लिये सरकार ने नये सिरे से बोलियां आमंत्रित की

सरकार की पवन हंस में 51 प्रतिशत और ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ओएनजीसी) की इसमें 49 प्रतिशत हिस्सेदारी है। वित्त वर्ष 2019-20 में कंपनी को 28 करोड़ रुपये और 2018-19 में 69 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ था

India TV Paisa Desk India TV Paisa Desk
Published on: December 08, 2020 18:39 IST
पवन हंस के लिए नए सिरे...- India TV Paisa
Photo:GOOGLE

पवन हंस के लिए नए सिरे से बोली 

नई दिल्ली। सरकार ने मंगलवार को हेलीकॉप्टर सेवा प्रदाता कंपनी पवन हंस में प्रबंधन नियंत्रण सौंपने समेत रणनीतिक बिक्री के लिये फिर से बोलियां आमंत्रित की है। इससे पहले, दो बार इसकी बिक्री का प्रयास असफल रहा है। सरकार की पवन हंस में 51 प्रतिशत और ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ओएनजीसी) की इसमें 49 प्रतिशत हिस्सेदारी है। पूर्व में ओएनजीसी ने सरकार की हिस्सेदारी बेचे जाने के साथ कंपनी में अपनी भी पूरी हिस्सेदारी बेचने की पेशकश करने का निर्णय किया था। निवेश और लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) ने प्रारंभिक सूचना ज्ञापन (पीआईएम) जारी किया है और संभावित खरीदारों से 19 जनवरी, 2021 तक रूचि पत्र आमंत्रित किया है। इससे पहले, सरकार ने प्रबंधन नियंत्रण सौंपने समेत रणनीति विनिवेश के जरिये पवन हंस में अपनी पूरी इक्विटी हिस्सेदारी बेचने का निर्णय किया था। सूचना ज्ञापन में कहा गया है कि नागर विमानन मंत्रालय को दी गयी जमीन पर रोहिणी में हेलीपोर्ट प्रस्तावित सौदे का हिस्सा नहीं होगा और पवन हंस लि.(पीएचएल) से इसे अलग किया जाएगा। मंत्रालय को यह जमीन दिल्ली विकास प्राधिकरण ने पट्टे पर दी हुई है।

पीआईएम में कहा गया है, ‘‘सफल बोलीदाता को रोहिणी हेलीपोर्ट के उपयोग का अधिकार 10 साल के लिये देने पर विचार किया जा रहा है। अगर, इसे मंजूरी मिलती है, प्रस्तावित सौदे की तारीख से यह उपयोग के लिये उपलब्ध होगा।’’ फिलहाल इसका उपयोग पवन हंस कर रही है। कर्मचारियों से संबंधित प्रावधान के बारे में इसमें कहा गया है कि सफल बोलीदाता यह सुनिश्चित करेंगे कि कंपनी किसी भी स्थायी कर्मचारी को प्रस्तावित सौदे की तारीख से एक साल तक के लिये नौकरी से नहीं निकाले। पीआईएम के अनुसार अगर इस अवधि में कर्मचारियों को निकाला जाता है, यह सुनिश्चित हो कि कंपनी अपने कर्मचारियों को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की पेशकश करे। पवन हंस का गठन अक्टूबर 1985 में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम के रूप में हुआ। मुख्य रूप से इसका कार्य ओएनजीसी को उत्खनन कार्यों के लिये हेलीकॉप्टर सेवा उपलब्ध कराना है।

कंपनी की अधिकृत पूंजी 31 मार्च, 2020 की स्थिति के अनुसार 560 करोड़ रुपये और चुकता शेयर पूंजी 557 करोड़ रुपये थी। संभावित बोलीदाता पीआईएम के बारे में सवाल 22 दिसंबर तक कर सकते हैं। इससे पहले, 2018 में सरकार ने पवन हंस में 51 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने के लिये बोली आमंत्रित की थी। हालांकि ओएनजीसी के सरकार की हिस्सेदारी के साथ ही अपनी 49 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने के निर्णय के बाद पेशकश को वापस ले लिया गया। उसके बाद 2019 में पवन हंस के विनिवेश के लिये दूसरा प्रयास किया गया, लेकिन निवेशकों ने इसमें रूचि नहीं दिखायी। कंपनी के कर्मचारियों की संख्या 31 जुलाई, 2020 की स्थिति के अनुसार 668 थी। इसमें 363 कर्मचारी स्थायी और 323 कर्मचारी अनुबंध पर थे। वित्त वर्ष 2019-20 में कंपनी को 28 करोड़ रुपये और 2018-19 में 69 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ था।

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