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जीएसटी नेटवर्क ने नवंबर ने स्वत: चालित जीएसटीआर-3बी को लागू किया

व्यवसायों द्वारा दाखिल किए गए आपूर्ति रिटर्न जीएसटीएन-1 के आधार पर जीएसटीएन अपने आप देनदारी की गणना कर लेगा, जबकि प्रणाली द्वारा तैयार किए गए मसौदा स्टेटमेंट जीएसटीआर-2बी से इनपुट क्रेडिट टैक्स (आईटीसी) की गणना होगी।

India TV Paisa Desk India TV Paisa Desk
Published on: December 13, 2020 21:55 IST
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Photo:FILE

स्वत: सृजित मासिक बिक्री रिटर्न फॉर्म जीएसटीआर-3बी लागू

नई दिल्ली। जीएसटी नेटवर्क ने रविवार को कहा कि व्यवसायिक इकाइयां अब प्रणाली से स्वत: सृजित मासिक बिक्री रिटर्न फॉर्म जीएसटीआर-3बी का उपयोग कर सकते हैं। वस्तु एवं सेवा कर नेटवर्क (जीएसटीएन) ने कहा, ‘‘करदाताओं की सुविधा के लिए अब प्रणाली जीएसटीआर-1 में दिए गए ब्यौरे के आधार पर स्वत: जीएसटीआर-3बी (मासिक) और आईटीसी स्टेटमेंट जीएसटीआर-2बी का ड्राफ्ट तैयार कर सकेगी।’’ व्यवसायों द्वारा दाखिल किए गए आपूर्ति रिटर्न जीएसटीएन-1 के आधार पर जीएसटीएन अपने आप देनदारी की गणना कर लेगा, जबकि प्रणाली द्वारा तैयार किए गए मसौदा स्टेटमेंट जीएसटीआर-2बी से इनपुट क्रेडिट टैक्स (आईटीसी) की गणना होगी। जीएसटीएन ने कहा, ‘‘यदि किसी विशेष अवधि की कुल देयता नकारात्मक है, तो उसे स्वत: गणना में शून्य देनदारी माना जाएगा।’’

जीएसटी पंजीकृत छोटे कारोबारियों दाखिल करने होंगे चार बिक्री रिटर्न

माल एवं सेवाकर यानि जीएसटी प्रक्रिया को और सरल करते हुये बिक्री रिटर्न दाखिल करने के मामले में कुछ और बदलाव जल्द लागू होने जा रहे हैं। सूत्रों के द्वारा मिली जानकारी के मुताबिक सालाना पांच करोड़ रुपये तक का कारोबार करने वाले छोटे कारोबारियों को अगले वर्ष जनवरी से एक साल के दौरान मात्र चार बिक्री रिटर्न दाखिल करने होंगे। वर्तमान में इन कारोबारियों को मासिक आधार पर कुल 12 रिटर्न दाखिल करने होते हैं। सूत्रों ने बताया कि कर की मासिक भु्गतान योजना के साथ तिमाही रिटर्न दाखिल (क्यूआरएमपी) करने की योजना का असर करीब 94 लाख करदाताओं पर पड़ेगा। यह जीएसटी के तहत पंजीकृत करदाताओं का लगभग 92 प्रतिशत है। यानी इस योजना से जीएसटी में पंजीकृत कारोबारियों की एक बड़ी संख्या को फायदा होगा। इस प्रकार अगले साल जनवरी से छोटे कारोबारियों को साल में चार जीएसटीआर-3बी और चार जीएसटीआर-1 रिटर्न दाखिल करने होंगे। सूत्रों ने बताया कि इस योजना को इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) उपलब्ध कराने में भी लागू किया जाएगा। यह केवल रिपोर्ट किए जाने वाले बिलों को लेकर होगी। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत इनवॉयस दाखिल करने की सुविधा (आईआईएफ) का विकल्प भी दिया जाएगा।

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