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EPF में हर महीने जमा हो रही राशि के हैं ढेरों फायदे, बीच में निकालने से पहले जान लें ये अहम बातें

Edited By: Sourabha Suman @sourabhasuman
Published : Dec 14, 2024 12:00 am IST, Updated : Dec 14, 2024 12:00 am IST

नियोक्ता/कंपनी न सिर्फ पीएफ फंड में योगदान करता है, बल्कि कर्मचारी की पेंशन के लिए भी जरूरी योगदान करता है जिसका इस्तेमाल कर्मचारी द्वारा रिटायरमेंट के बाद किया जा सकता है।

किसी भी तरह की आपात परिस्थिति में कर्मचारी समय से पहले भी इस फंड का इस्तेमाल कर सकते हैं। - India TV Paisa
Photo:FILE किसी भी तरह की आपात परिस्थिति में कर्मचारी समय से पहले भी इस फंड का इस्तेमाल कर सकते हैं।

आप अगर नौकरी करते हैं तो जाहिर है आप ईपीएफ में भी अंशदान करते हैं। ईपीएफ (कर्मचारी भविष्य निधि) कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) द्वारा प्रदान की जाने वाली एक रिटायरमेंट बेनिफिट स्कीम है। इसमें कर्मचारी और नियोक्ता मूल वेतन और महंगाई भत्ते के 12% के बराबर अनुपात में मासिक आधार पर योजना में योगदान करते हैं। यानी आप जो ईपीएफ में हर महीने तय राशि डाल रहे हैं, वह काफी फायदेमंद है। इसे समझ लेंगे तो आप ईपीएफ से पैसे नहीं निकालना चाहेंगे। आइए, जानते हैं कि ईपीएफ में जमा राशि कैसे आपके लिए आर्थिक तौर पर काफी मददगार साबित होते हैं।

इतने फायदे मिलते हैं

लंबे समय की आर्थिक सुरक्षा

ईपीएफ अकाउंट में जो धनराशि जमा होती है, उसे आप अपने रोजमर्रा के कामों के लिए आसानी से निकाल नहीं सकते हैं और आपके पैसे की बचत हो रही होती है।

रिटायरमेंट के समय जमा राशि का इस्तेमाल
ईपीएफ योजना के तहत जमा राशि का इस्तेमाल कर्मचारी के रिटायरमेंट के समय किया जा सकता है। इससे कर्मचारी को पैसे की बचत और सुरक्षा संबंधी राहत मिलती है।

इमरजेंसी में आता है काम
किसी भी तरह की आपात परिस्थिति में कर्मचारी समय से पहले भी इस फंड का इस्तेमाल कर सकते हैं। इस योजना में कुछ खास मामलों में इस तरह की समय-पूर्व निकासी की व्यवस्था की गई है।

बेरोजगारी/इनकम लॉस
अगर किसी वजह से कर्मचारी की मौजूदा नौकरी चली जाती है, तो इस फंड का इस्तेमाल खर्चों को पूरा करने के लिए किया जा सकता है। नौकरी छोड़ने के एक महीने बाद कर्मचारी अपने ईपीएफ फंड का 75% और बेरोजगारी के 2 महीने बाद बाकी 25% निकालने के लिए स्वतंत्र है। नौकरी से अचानक हटा देने पर कर्मचारी तब तक इस फंड का इस्तेमाल कर सकता है, जब तक उसे कोई उपयुक्त नई नौकरी नहीं मिल जाती।

मौत की स्थिति में मददगार
अगर किसी वजह से कर्मचारी की मृत्यु हो जाती है तो ऐसे में ब्याज के साथ इकट्ठा की गई राशि कर्मचारी के नॉमिनी को दी जाती है जिससे परिवार को कठिन परिस्थितियों का सामना करने में मदद मिलती है।

कर्मचारी की विकलांगता या शारीरिक अक्षमता
अगर किसी वजह से विकलांग हो गया है यानी कर्मचारी काम करने की हालत में नहीं है, तो वह इस फंड का इस्तेमाल इस स्थिति में कर सकता है।

पेंशन योजना
नियोक्ता/कंपनी न सिर्फ पीएफ फंड में योगदान करता है, बल्कि कर्मचारी की पेंशन के लिए भी जरूरी योगदान करता है जिसका इस्तेमाल कर्मचारी द्वारा रिटायरमेंट के बाद किया जा सकता है।

हर जगह आसानी से उपयोग हो सकता है
अपने यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (यूएएन) की मदद से कर्मचारी ईपीएफ मेंबरशिप पोर्टल पर जाकर आसानी से अपने पीएफ अकाउंट को एक्सेस कर सकते हैं। अगर वे नौकरी बदलते हैं, तो वे अपने खाते को भी ट्रांसफर कर सकते हैं।

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