ये फैसला EPFO की सबसे बड़े फैसले लेने वाली बॉडी, सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (CBT) की 239वीं मीटिंग में लिया गया। लेबर और एम्प्लॉयमेंट मिनिस्टर मनसुख मंडाविया ने आज हुई इस मीटिंग की अध्यक्षता की।
ईपीएफओ का वो खाता निष्क्रिय माना जाता है, जिसमें 36 महीने से भी ज्यादा समय तक कर्मचारी या नियोक्ता की ओर से कोई अंशदान जमा नहीं हुआ हो।
ईपीएफओ एक नया मोबाइल ऐप लॉन्च करेगा, जिसके जरिए ईपीएफओ सब्सक्राइबर्स यूपीआई गेटवे का इस्तेमाल कर पैसे निकालने के साथ ही पासबुक बैलेंस जैसी अन्य सेवाओं का भी लाभ उठा सकेंगे।
ईपीएफओ ने सब्सक्राइबर्स को सलाह है कि वे अपने UAN को हमेशा अपडेट रखें और आधिकारिक ईपीएफओ पोर्टल या ऐप पर अपडेट जानते रहें। इस पहल से 100% ऑटो-सेटलमेंट का ग्राउंड जीरो पर उतारा जा सकेगा। डॉक्यूमेंट्स के साथ कार्यालय के चक्कर काटने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
ईपीएफओ की शीर्ष निर्णय लेने वाली संस्था केंद्रीय न्यासी बोर्ड (सीबीटी) ने यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इससे करीब 30 करोड़ ईपीएफओ मेंबर्स को बड़ी राहत और सुविधा मिलेगी।
वित्त वर्ष 2025 के लिए, 33.56 करोड़ खातों वाले 13.88 लाख कंपनियों के लिए सालाना खाता अपडेट किया जाना था, जिसमें से 8 जुलाई तक 13.86 लाख कंपनियों के 32.39 करोड़ खातों में 8.25 प्रतिशत की दर से ब्याज का पैसा जमा किया जा चुका है।
पहले जिन देशों के साथ भारत को कोई एग्रीमेंट नहीं रहता था, वहां उन कर्मचारियों की सैलरी से हर महीने सामाजिक सुरक्षा के नाम पर एक तय रकम काटी जाती रही है। इन पैसों से कर्मचारियों को कोई विशेष फायदा नहीं मिलता था।
केंद्रीय न्यासी बोर्ड (सीबीटी) ने ईपीएफ योजना, 1952 के पैराग्राफ 60 (2) (बी) में एक महत्वपूर्ण संशोधन को मंजूरी दी। नए प्रावधान के बाद, ईपीएफ शेष राशि पर ब्याज ईपीएफ दावे के निपटान की तारीख तक मिलेगा।
करीब 13. 23 लाख सदस्य, जो पहले बाहर हो गए थे, मार्च 2025 में ईपीएफओ में फिर से शामिल हो गए, जो फरवरी 2025 की तुलना में 0.39 प्रतिशत की वृद्धि और मार्च 2024 की तुलना में 12.17 प्रतिशत साल-दर-साल वृद्धि है।
अगर कंपनी पर ईपीएफ एक्ट लागू है और आपका वेतन 15,000 रुपये तक है तो आपको ईपीएफ, ईडीएलआई और पेंशन स्कीम का सदस्य अनिवार्य रूप से बनाया जाएगा।
कर्मचारी भविष्य निधि योजना, 1952 के मुताबिक, पीएफ अकाउंटहोल्डर विवाह, उच्च शिक्षा, मकान खरीदना/बनाना, या चिकित्सा बीमारी और बेरोजगारी सहित दूसरे कारणों के लिए अपने धन का एक हिस्सा निकाल सकते हैं।
पहले, ईपीएफ खाते में डिटेल्स अपडेट कराने के लिए कंपनी से वेरिफिकेशन कराने की जरूरत होती थी, जिसमें 28 दिनों तक का समय लग जाता था। अब, 45 प्रतिशत रिक्वेस्ट कर्मचारियों द्वारा सेल्फ-अप्रूव्ड किए जा सकते हैं और 50% रिक्वेस्ट के लिए EPFO की भागीदारी के बिना सिर्फ कंपनी के अप्रूवल की जरूरत होती है।
ईपीएफओ ने मार्च 2022 में अपने सात करोड़ से ज्यादा मेंबर्स के लिए वित्त वर्ष 2021-22 के लिए ईपीएफ पर ब्याज को 4 दशक के निचले स्तर 8.1 प्रतिशत पर ला दिया था, जो वित्त वर्ष 2020-21 में 8.5 प्रतिशत था। वित्त वर्ष 2020-21 के लिए ईपीएफ पर 8.10 प्रतिशत ब्याज दर थी।
यदि कोई व्यक्ति खुद को ईपीएफओ का कर्मचारी बताकर आपको फोन कॉल, मैसेज, वॉट्सऐप, ईमेल आदि के जरिए आपके ईपीएफओ खाते से जुड़ी गोपनीय जानकारियां- यूएएन नंबर, पासवर्ड, पैन नंबर, आधार नंबर, बैंक खाते की डिटेल्स, ओटीपी पूछता है तो उसे कोई भी जानकारी न दें।
ईपीएफओ ने देश भर में अपने सभी क्षेत्रीय कार्यालयों में केंद्रीकृत पेंशन भुगतान प्रणाली (सीपीपीएस) शुरू कर दी है। ईपीएफओ की इस पहल से उन पेंशनभोगियों को बड़ी राहत होगी जो रिटायरमेंट के बाद अपने गृहनगर चले जाते हैं।
इस सुविधा की शुरुआत करने के लिए ईपीएफओ, आरबीआई और प्रमुख बैंकों के साथ सलाह-मशवरा करने जा रहा है, ताकि इस सिस्टम को आखिर कैसे स्थापित किया जा सकता है। इस पर एक रोडमैप तैयार किया जा सके।
नियोक्ता/कंपनी न सिर्फ पीएफ फंड में योगदान करता है, बल्कि कर्मचारी की पेंशन के लिए भी जरूरी योगदान करता है जिसका इस्तेमाल कर्मचारी द्वारा रिटायरमेंट के बाद किया जा सकता है।
सुमिता डावरा ने बताया कि अगले साल जनवरी में आईटी 2.1 अपग्रेड लागू होने की उम्मीद है, जिसके बाद ईपीएफओ का आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर देश के बैंकिंग सिस्टम जैसा हो जाएगा। जिससे ईपीएफओ मेंबर और पेंशनर कम से कम मानवीय हस्तक्षेप के साथ अपने ईपीएफ खाते में जमा पैसों का एक्सेस मिल जाएगा।
ईपीएफओ के मुताबिक, कोई भी व्यक्ति अपने बंद पड़े खाते को दोबारा शुरू करा सकता है और खाते में जमा पैसों का एक्सेस प्राप्त कर सकता है। अगर आपका खाता UAN न होने की वजह से बंद हो गया है तो आपको ईपीएफओ के दफ्तर जाना होगा और यूएएन नंबर के लिए अप्लाई करना होगा।
साल 1976 में शुरू की गई ईडीएलआई योजना का मकसद कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के सदस्यों को बीमा लाभ प्रदान करना है ताकि सदस्य की मृत्यु के मामले में हर सदस्य के परिवार को कुछ वित्तीय सहायता सुनिश्चित की जा सके।
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