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ITR में देनी होगी विदेशी संपत्ति और कमाई की सारी जानकारी, 31 दिसंबर के बाद हो सकती है तगड़ी कार्रवाई

 Written By: Sunil Chaurasia
 Published : Dec 03, 2025 05:05 pm IST,  Updated : Dec 03, 2025 05:06 pm IST

एसएमएस और ईमेल में टैक्सपेयर्स से 31 दिसंबर 2025 से पहले ITR को रिव्यू और रिवाइज करने की सलाह दी जा रही है, ताकि सजा से बचा जा सके।

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31 दिसंबर से पहले देनी होगी जानकारी (सांकेतिक तस्वीर) Image Source : INCOME TAX WEBSITE

CBDT (सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्स) इन दिनों टैक्सपेयर्स को टेक्स्ट मैसेज और ईमेल भेज रहा है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने इन टेक्स्ट मैसेज और ईमेल के जरिए टैक्सपेयर्स को सलाह दी है कि अगर उन्होंने पिछले वित्तीय वर्ष में अपनी विदेशी इनकम और ओवरसीज ऐसेट्स की जानकारी नहीं दी है, वे 31 दिसंबर तक अपने इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) को रिवाइज कर लें। CBDT के इस एक्शन को ऐसे टैक्सपेयर्स के लिए एक चेतावनी भी समझी जा सकती है, जिन्होंने अपने आईटीआर में विदेशी इनकम और ऐसेट्स की जानकारी नहीं दी है। CBDT ऐसे टैक्सपेयर्स के लिए NUDGE (नॉन-इंट्रूसिव यूसेज ऑफ़ डेटा टू गाइड एंड इनेबल) नाम का एक कैंपेन चला रहा है, जिसके तहत विदेशी इनकम और ऐसेट्स का खुलासा किया जा सकता है।

31 दिसंबर से पहले देनी होगी जानकारी

फाइनेंशियल एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुकाबिक, ये दूसरा NUDGE कैंपेन है, जिसके तहत CBDT 28 नवंबर 2025 से टैक्सपेयर्स को एसएमएस और ईमेल के माध्यम से सलाह दे रहा है। इस एसएमएस और ईमेल में टैक्सपेयर्स से 31 दिसंबर 2025 से पहले ITR को रिव्यू और रिवाइज करने की सलाह दी जा रही है, ताकि सजा से बचा जा सके। बताते चलें कि CBDT ने 17 नवंबर 2024 को पहला NUDGE कैंपेन शुरू किया था, जिसमें 24,678 टैक्सपेयर्स ने AY 2024-25 के लिए अपने रिटर्न को रिवाइज किया था। पहले कैंपेन के तहत कुल 29,208 करोड़ रुपये के विदेशी ऐसेट्स और 1,089.88 करोड़ रुपये की विदेशी सोर्स से इनकम की जानकारी मिली थी।

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के पास मौजूद है विदेशी संपत्तियों को ट्रैक करने वाला सिस्टम

CBDT ने AY2025-26 के लिए ऐसे कई हाई-रिस्क वाले मामलों की पहचान की है, जहां विदेशी ऐसेट्स मौजूद हैं, लेकिन आईटीआर में उनकी जानकारी नहीं दी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, सीबीडीटी ने ऐसे मामलों की संख्या के बारे में पुख्ता जानकारी नहीं दी है। बताते चलें कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के नियमों के मुताबिक, टैक्सपेयर्स को अपने आईटीआर में विदेशी इनकम और विदेशी ऐसेट्स की जानकारी देना जरूरी है। बताते चलें कि भारत में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के पास अमेरिका समेत दूसरे देशों में किए जाने वाले सभी तरह के निवेश को ट्रैक करने का एक शक्तिशाली सिस्टम मौजूद है।

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