नई दिल्ली। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी एनटीपीसी ने बीते वित्त वर्ष 2019-20 में 24,056.50 करोड़ रुपए का कर्ज जुटाया है। इस तरह 31 मार्च, 2020 तक कंपनी पर कुल 1,07,373.37 करोड़ रुपए का कर्ज हो गया है। एनटीपीसी ने शेयर बाजारों को भेजी सूचना में कहा कि बढ़े हुए कर्ज की मूल परिपक्वता अवधि एक साल से अधिक की है। इसमें बाह्य वाणिज्यिक ऋण (ईसीबी) शामिल नहीं है।
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कंपनी ने 2019-20 में ऋण प्रतिभूतियां जारी कर 7,356.50 करोड़ रुपए जुटाए। वित्त वर्ष के दौरान कंपनी को ऋण प्रतिभूतियां जारी कर अनिवार्य रूप से 6,014.13 करोड़ रुपए की राशि जुटानी थी। बीते वित्त वर्ष के दौरान एनटीपीसी ने टिहरी हाइड्रो पावर कॉम्प्लेक्स (टीएचडीसीआईएल) इंडिया और नार्थ ईस्टर्न इलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन (नीपको) में सरकार की समूची हिस्सेदारी का 11,500 करोड़ रुपए में अधिग्रहण किया। देश की सबसे बड़ी बिजली उत्पादन कंपनी की स्थापित क्षमता इस समय 62,110 मेगावॉट की है। एनटीपीसी के स्टेशनों की संख्या 45 और संयुक्त उद्यम स्टेशनों की संख्या 25 है। एनटीपीसी ने 2032 तक 130 गीगावॉट की कंपनी बनने के लिए दीर्घावधि की कॉरपोरेट योजना बनाई है।
फेडरल बैंक 80 करोड़ रुपए में खरीदेगा जीवन बीमा संयुक्त उद्यम में चार प्रतिशत अतिरिक्त हिस्सेदारी
दक्षिण भारत का फेडरल बैंक जीवन बीमा संयुक्त उद्यम आईडीबीआई फेडरल लाइफ इंश्योरेंस में 80 करोड़ रुपए में चार प्रतिशत अतिरिक्त हिस्सेदारी खरीदेगा। फेडरल बैंक के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) श्याम श्रीनिवासन ने कहा कि हम सार्वजनिक क्षेत्र के आईडीबीआई बैंक से संयुक्त उद्यम में चार प्रतिशत अतिरिक्त हिस्सेदारी का अधिग्रहण करेंगे। इससे 12 साल पुरानी कंपनी में हमारी हिस्सेदारी बढ़कर 30 प्रतिशत हो जाएगी।
उन्होंने कहा कि नियमनों के तहत यह उसके लिए अधिकतम हिस्सेदारी की सीमा है। उन्होंने कहा कि आईडीबीआई बैंक कंपनी में अपनी 48 प्रतिशत हिस्सेदारी को घटाकर 21 प्रतिशत पर लाएगा। इसके लिए वह 27 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचेगा। हालांकि, श्रीनिवासन ने इसके लिए कोई समयसीमा नहीं बताई। फेडरल बैंक जहां कंपनी में चार प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदेगा। वहीं उनकी नीदरलैंड की भागीदार एजिस इंश्योरेंस इंटरनेशनल एनवी 23 प्रतिशत हिस्सेदारी का अधिग्रहण करेगी। इससे संयुक्त उद्यम में उसकी हिस्सेदारी बढ़कर 49 प्रतिशत हो जाएगी। किसी विदेशी भागीदार के लिए यह जीवन बीमा उद्यम में अधिकतम हिस्सेदारी की सीमा है।