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ई-कॉमर्स निर्यात को मिलेगा बढ़ावा, डीजीएफटी, राजस्व विभाग मिलकर कर रहे हैं काम

 Edited By: Alok Kumar @alocksone
 Published : Jun 23, 2024 03:18 pm IST,  Updated : Jun 23, 2024 03:18 pm IST

विदेश व्यापार महानिदेशक संतोष कुमार सारंगी ने कहा, “इस संबंध में बहुत चीजें सुव्यवस्थित करने की जरूरत है। हम राजस्व विभाग के साथ मिलकर ई-कॉमर्स केंद्र स्थापित करने पर काम कर रहे हैं, ताकि माल की खेप को मंजूरी में तेजी लाई जा सके।’’

E-commerce - India TV Hindi
ई-कॉमर्स Image Source : FILE

देश से ई-कॉमर्स निर्यात को बढ़ावा देने के लिए विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) राजस्व विभाग के साथ मिलकर काम कर रहा है। इसके तहत देशभर में निर्दिष्ट ई-कॉमर्स केंद्र स्थापित किए जाएंगे जिससे ऑनलाइन निर्यात की प्रक्रिया को सुसंगत बनाया जा सकेगा। उद्योग सूत्रों के अनुसार, फिलहाल देश का ई-कॉमर्स निर्यात दो अरब डॉलर है, जबकि चीन का निर्यात 350 अरब डॉलर है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य एक सहयोगी ई-कॉमर्स पारिस्थितिकी तंत्र की स्थापना करके इस अंतर को पाटना है।

राजस्व विभाग के साथ मिलकर कर रहे काम 

विदेश व्यापार महानिदेशक संतोष कुमार सारंगी ने कहा, “इस संबंध में बहुत चीजें सुव्यवस्थित करने की जरूरत है। हम राजस्व विभाग के साथ मिलकर ई-कॉमर्स केंद्र स्थापित करने पर काम कर रहे हैं, ताकि माल की खेप को मंजूरी में तेजी लाई जा सके।’’ उन्होंने कहा कि इन केंद्रों में समर्पित सीमा शुल्क और सुरक्षा जांच जैसी सुविधाएं होंगी, जिससे पहले से मंजूरी प्राप्त पार्सल को हवाई अड्डों पर ‘ग्रीन चैनल’ के माध्यम से आगे बढ़ाया जा सकेगा और आगे इनकी जांच की जरूरत नहीं होगी। 

सरकार सुरक्षा और शुल्क का काम देखेगी

सारंगी ने कहा कि यह दृष्टिकोण अन्य देशों में अपनाई गई सर्वोत्तम प्रक्रियाओं को प्रतिबिंबित करता है। उन्होंने बताया कि ई-कॉमर्स केंद्र का निर्माण और रखरखाव निजी संस्थाओं द्वारा किया जाएगा, जबकि सरकार सुरक्षा और सीमा शुल्क मंजूरी का काम देखेगी। वहीं उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे ने मंगलवार को ई-कॉमर्स कंपनियों को ‘डार्क पैटर्न’ के रूप में जाने जाने वाले भ्रामक यूजर इंटरफेस डिजाइनो को लागू करने के खिलाफ चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि इस तरह का व्यवहार उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है और यह अनुचित कारोबार जैसा है। ए

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