1. Hindi News
  2. पैसा
  3. बिज़नेस
  4. S&P ने भारत की आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को घटाकर सात प्रतिशत किया, जानें क्यों

S&P ने भारत की आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को घटाकर सात प्रतिशत किया, जानें क्यों

 Edited By: Alok Kumar @alocksone
 Published : Nov 28, 2022 03:36 pm IST,  Updated : Nov 28, 2022 03:36 pm IST

भारत की जीडीपी वृद्धि दर वर्ष 2021 में 8.5% रही थी। वित्त वर्ष 2022-2023 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर सात प्रतिशत और अगले वित्त वर्ष में छह प्रतिशत रहने का अनुमान है।

एसएंडपी - India TV Hindi
एसएंडपी Image Source : FILE

रेटिंग एजेंसी एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स (S&P) ने सोमवार को भारत की आर्थिक वृद्धि दर अनुमान को घटाकर सात प्रतिशत कर दिया। हालांकि उसने यह भी कहा कि घरेलू मांग की वजह से अर्थव्यवस्था पर वैश्विक सुस्ती का प्रभाव कम होगा। इससे पहले एजेंसी ने सितंबर महीने में भारत की जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) वृद्धि दर 2022-23 में 7.3 प्रतिशत और 2023-24 में 6.5 प्रतिशत रहने की संभावना जतायी थी। एस एंड पी ग्लोबल रेटिंग्स के एशिया प्रशांत क्षेत्र के मुख्य अर्थशास्त्री लुइस कुइज्स ने कहा, वैश्विक नरमी का भारत जैसी घरेलू मांग आधारित अर्थव्यवस्थाओं पर कम प्रभाव पड़ेगा। वित्त वर्ष 2022-2023 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर सात प्रतिशत और अगले वित्त वर्ष में छह प्रतिशत रहने का अनुमान है।’’ इससे पहले भी मूडीज, इंक्रा, गोल्डमैन समेत कई रेटिंग एजेंसियों ने चालू वित्त वर्ष के लिए भारती की जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान घटाया है। इसकी वजह दुनियाभर में सुस्ती का भारत पर पड़ने वाला प्रभाव बताया जा रहा है। 

वर्ष 2021 में 8.5% रही थी जीडीपी वृद्धि दर

उल्लेखनीय है कि भारत की जीडीपी वृद्धि दर वर्ष 2021 में 8.5 प्रतिशत रही थी। एस एंड पी ने एशिया-प्रशांत क्षेत्र के लिये अद्यतन तिमाही आर्थिक रिपोर्ट में कहा कि कुछ देशों में कोविड के बाद मांग में जो सुधार हो रहा है, उसमें और तेजी की उम्मीद है। इससे भारत में अगले साल आर्थिक वृद्धि को समर्थन मिलेगा। मुद्रास्फीति के बारे में रेटिंग एजेंसी ने कहा कि यह चालू वित्त वर्ष में औसतन 6.8 प्रतिशत रहेगी और भारतीय रिजर्व बैंक की मानक ब्याज दर मार्च 2023 में बढ़कर 6.25 प्रतिशत होने की संभावना है। आरबीआई महंगाई को काबू में लाने के लिये पहले ही नीतिगत दर 1.9 प्रतिशत बढ़ा चुका है। इससे प्रमुख नीतिगत दर रेपो तीन साल के उच्च स्तर 5.9 प्रतिशत पर पहुंच गयी है। 

खुदरा महंगाई में मिली राहत 

देश की थोक और खुदरा मुद्रास्फीति अक्टूबर महीने में घटी है। रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण आपूर्ति संबंधी बाधाओं से यह लगभग पूरे साल संतोषजनक स्तर से ऊपर रही है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित महंगाई दर तीन महीने के निचले स्तर 6.7 प्रतिशत रही जबकि थोक मुद्रास्फीति 19 महीने के निम्न स्तर 8.39 प्रतिशत पर आ गयी है। विनिमय दर के बारे में एस एंड पी ने कहा कि एशिया के उभरते बाजार में मुद्रा भंडार कम हुआ है। मार्च के अंत तक रुपये में 79.50 प्रति डॉलर रहने का अनुमान है जो अभी 81.77 है। 

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। Business से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें पैसा