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देश में अगले 25 साल तक हर बच्चे को पढ़ा सकते हैं 10 भारतीय, जानिए कौन हैं ये शख्स

 Edited By: India TV Paisa Desk
 Published : Jan 17, 2022 11:24 am IST,  Updated : Jan 17, 2022 11:30 am IST

रिपोर्ट में आगे कहा गया कि यदि 10 सबसे अमीर भारतीय अरबपतियों को प्रतिदिन 10 लाख अमेरिकी डॉलर खर्च करने हों तो उनकी वर्तमान संपत्ति 84 साल में खत्म होगी।

बच्चे - India TV Hindi
बच्चे  Image Source : PTI

Highlights

  • ऑक्सफैम इंडिया की वार्षिक असमानता सर्वेक्षण से मिली जानकारी
  • 142 भारतीय अरबपतियों के पास कुल 53 लाख करोड़ की संपत्ति
  • सबसे धनी 10% लोगों ने राष्ट्रीय संपत्ति का 45% हिस्सा हासिल किया

नई दिल्ली/दावोस। कोविड-19 महामारी के दौरान भारत के अरबपतियों की कुल संपत्ति बढ़कर दोगुने से अधिक हो गई और 10 सबसे अमीर लोगों की संपत्ति 25 साल तक देश के हर बच्चे को स्कूली शिक्षा एवं उच्च शिक्षा देने के लिए पर्याप्त है। एक अध्ययन में सोमवार को यह बात कही गई। अध्ययन के मुताबिक इस दौरान भारत में अरबपतियों की संख्या 39 प्रतिशत बढ़कर 142 हो गई। 

98 अमीरों की संपत्ति 55.5 करोड़ लोगों के बराबर

वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए आयोजित विश्व आर्थिक मंच के दावोस एजेंडा शिखर सम्मेलन के पहले दिन जारी ऑक्सफैम इंडिया की वार्षिक असमानता सर्वेक्षण में कहा गया कि यदि सबसे अमीर 10 प्रतिशत लोगों पर एक प्रतिशत अतिरिक्त कर लगा दिया जाए, तो देश को लगभग 17.7 लाख अतिरिक्त ऑक्सीजन सिलेंडर मिल सकते हैं। आर्थिक असमानता पर ऑक्सफैम की रिपोर्ट में आगे कहा गया कि 142 भारतीय अरबपतियों के पास कुल 719 अरब अमेरिकी डॉलर (53 लाख करोड़ रुपये से अधिक) की संपत्ति है। देश के सबसे अमीर 98 लोगों की कुल संपत्ति, सबसे गरीब 55.5 करोड़ लोगों की कुल संपत्ति के बराबर है। 

10 लाख डॉलर रोजना खर्च करने पर 84 साल चलेगी संपत्ति 

रिपोर्ट में आगे कहा गया कि यदि 10 सबसे अमीर भारतीय अरबपतियों को प्रतिदिन 10 लाख अमेरिकी डॉलर खर्च करने हों तो उनकी वर्तमान संपत्ति 84 साल में खत्म होगी। ऑक्सफैम ने कहा कि इन अरबपतियों पर वार्षिक संपत्ति कर लगाने से हर साल 78.3 अरब अमेरिकी डॉलर मिलेंगे, जिससे सरकारी स्वास्थ्य बजट में 271 प्रतिशत बढ़ोतरी हो सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक कोविड-19 की शुरुआत एक स्वास्थ्य संकट के रूप में हुई थी, लेकिन अब यह एक आर्थिक संकट बन गया है। 

कोरोना महामारी के दौरान तेजी से बढ़ी दौलत 

महामारी के दौरान सबसे धनी 10 प्रतिशत लोगों ने राष्ट्रीय संपत्ति का 45 प्रतिशत हिस्सा हासिल किया, जबकि नीचे की 50 प्रतिशत आबादी के हिस्से सिर्फ छह प्रतिशत राशि आई। अध्ययन में सरकार से राजस्व सृजन के अपने प्राथमिक स्रोतों पर फिर से विचार करने और कराधान के अधिक प्रगतिशील तरीकों को अपनाने का आग्रह किया गया।

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