बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में धोरैया विधानसभा सीट पर भी सभी दलों की निगाहें रहेंगी। आमतौर पर यह सीट जेडीयू के खाते में जाती रही है, लेकिन 2020 में एनडीए की अंदरूनी कलह के चलते आरजेडी यहां बाजी मारने में सफल रही। ऐसे में इस बार सभी दल यहां पूरा दमखम लगाना चाहेंगे, ताकि जीत हासिल कर सकें। 2024 में यहां एनडीए उम्मीदलवार को बढ़त मिली थी। ऐसे में एनडीए के हौसले और मजबूत हुए होंगे। हालांकि, केंद्र और राज्य के लिए लोगों की पसंद अलग हो सकती है। इसका असर विधानसभा चुनाव के नतीजों पर भी दिख सकता है। इस बार यहां 11 नवंबर को मतदान होना है।
धोरैया में जेडीयू को 2020 में हार का सामना करना पड़ा था। इससे पहले पार्टी यहां लगातार पांच चुनाव जीत चुकी थी। 2024 लोकसभा चुनाव में भी यहां एनडीए उम्मीदवार को जीत मिली थी। ऐसे में इस बार भी एनडीए के जीतने की प्रबल संभावना है।
कब किसे मिली जीत?
धोरैया पिछले कुछ समय में भले ही जेडीयू का दबदबा रहा हो, लेकिन ऐतिहासिक रूप से यह सीट किसी भी पार्टी का गढ़ नहीं बन पाई है। कांग्रेस, सीपीआई और जेडीयू ने इस सीट को पांच-पांच बार जीता है। 2000 में नीतीश की पार्टी का नाम समता पार्टी और तब भी इस सीट पर उनके उम्मीदवार को जीत मिली थी। वहीं, 1969 में एक निर्दलीय उम्मीदवार जीता था, जबकि राजद ने 2020 में पहली बार इस सीट पर जीत हासिल की थी।
किसका पलड़ा भारी?
धोरैया में निश्चित रूप से एनडीए का पलड़ा भारी है। जेडीयू का उम्मीदवार इस बार आसानी से जीत हासिल कर सकता है, लेकिन इसके लिए सत्ताधारी गठबंधन को अपनी एकजुटता बरकरार रखनी होगी। अंदरूनी कलह के चलते ही जेडीयू यहां पिछला चुनाव हारी थी और इस बार भी वैसा हो सकता है। अगर नीतीश और चिराग मिलकर चुनाव लड़ते हैं तो तेजस्वी के लिए जेडीयू के किले में सेंध लगाना आसान नहीं होगा।
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