झाझा: बिहार में विधानसभा चुनावों के लिए सभी पार्टियों ने कमर कस ली है। जोर-शोर से प्रचार अभियान चलाया जा रहा है। हर दल इसी उम्मीद में है कि जनता का आशीर्वाद उसे मिलेगा। बिहार के 243 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में से एक झाझा भी है। यह विधानसभा सीट बिहार के जमुई जिले में आती है। 2020 में यहां पर JDU से दामोदर रावत ने RJD के राजेंद्र यादव को 1679 वोटों के मार्जिन से हराया था। लेकिन इस बार बिहार की सियासत में काफी कुछ नया होने वाला है। एक तरफ चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की नई पार्टी जनसुराज मैदान में है, वहीं दूसरी तरफ RJD से निष्कासित तेज प्रताप यादव भी चुनाव में उतरने के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं। अब देखना ये होगा कि जनता का आशीर्वाद किसे मिलता है।
क्या हैं साल 2020 और 2015 के विधानसभा चुनाव के नतीजे?
साल 2020 के विधानसभा चुनावों में यहां से जेडीयू के दामोदर रावत जीते थे। उन्हें कुल 76972 वोट मिले थे। दूसरे नंबर पर राजद के राजेंद्र यादव रहे थे। उन्हें कुल 75293 वोट मिले थे। तीसरे नंबर पर बसपा के बिनोद पीडी. यादव रहे थे। उन्हें कुल 13479 वोट मिले थे। वहीं, पांचवें नंबर पर NOTA रहा था। उसे कुल 6278 वोट पड़े थे।
साल 2015 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी के रवीन्द्र यादव जीते थे। उन्हें कुल 65537 वोट मिले थे। दूसरे नंबर पर जेडीयू के दामोदर रावत रहे थे। उन्हें कुल 43451 वोट मिले थे। तीसरे नंबर पर निर्दलीय उम्मीदवार बिनोद पीडीय यादव थे जिन्हें 20745 वोट मिले थे।
कैसा होगा साल 2025 का चुनाव?
पिछले 2 विधानसभा चुनावों को देखें तो यहां से एक बार जेडीयू और एक बार बीजेपी जीती है। वहीं, अगर 2024 के लोकसभा चुनावों का रुझान कुछ संकेत देता है, तो राजद को झाझा में जीत दर्ज करने के लिए केवल प्रयास नहीं, बल्कि एक ठोस रणनीति और जनसमर्थन की जरूरत होगी। दूसरी पार्टियों के लिए ये जेडीयू के हाथ से सीट खींचने और जीतने का मौका होगा। देखना ये होगा कि बिहार की जनता किस पार्टी पर अपने भरोसे की मुहर लगाती है।
वैसे इस बार का चुनाव इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि नई सियासी पार्टी जनसुराज भी अपना भाग्य आजमा रही है। देखना ये भी होगा कि नई पार्टी पर बिहार की जनता कितना भरोसा करती है।