बिहार विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार जिन सीटों पर अपनी जीत तय मानकर चल रहे होंगे, उनमें एक नाम सुल्तानगंज का भी है। यह सीट लंबे समय से जनता दल यूनाइटेड के खाते में रही है और इस बार भी यह परंपरा कायम रहने के आसार हैं। साल 2000 के बाद से यहां नीतीश की पार्टी के अलावा किसी को भी जीत नहीं मिली है। खास बात यह है कि इस सीट पर नीतीश का दबदबा तब से कायम है, जब उनकी पार्टी का नाम समता पार्टी हुआ करता था। इस बार यहां दूसरे चरण में 11 नवंबर को मतदान होना है।
बिहार विधानसभा 2025 में असली मुकाबला तो एनडीए और इंडिया गठबंधन के बीच है, लेकिन इस सीट पर जेडीयू का कोई मुकाबला नहीं है। चिराग पासवान के साथ आने से सीट बंटवारे का गणित भले ही गड़बड़ाया हो, लेकिन एनडीए गठबंधन की ताकत जरूर बढ़ी है। वहीं, तेजस्वी और राहुल की जोड़ी भी पूरा दमखम दिखा रही है। इस बीच प्रशांत किशोर एक्स फैक्टर बनकर उभरे हैं और दोनों गठबंधन का खेल खराब कर सकते हैं।
कब किसे मिली जीत?
सुल्तानगंज विधानसभा सीट पर पिछले छह चुनाव तो जेडीयू ही जीत चुकी है। इससे पहले यहां कांग्रेस का दबदबा था और पार्टी को कुल सात बार जीत मिली थी। जनता दल दो बार इस सीट से जीता है। वहीं, जनता पार्टी और प्रजा सोशलिस्ट पार्टी यहां से एक-एक चुनाव जीत चुकी हैं। खास बात यह है कि राज्य में मौजूदा समय पर विधायकों की संख्या के लिहाज से दो सबसे बड़ी पार्टियां आरजेडी और बीजेपी हैं, लेकिन ये दोनों पार्टियां यहां अब तक कोई चुनाव नहीं जीत पाई हैं।
सातवीं जीत हासिल कर सकती है जेडीयू
2020 विधानसभा चुनाव में भी इस सीट पर जेडीयू के ललित नारायण मंडल को 11 हजार से ज्यादा वोट से जीत मिली थी। उन्होंने कांग्रेस के उम्मीदवार को हराया था। इस चुनाव में चिराग पासवाल ने लाजपा के उम्मीदवार को सिर्फ 10 हजार के करीब वोट मिले थे। 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान भी यहां जेडीयू उम्मीदवार को बढ़त मिली थी। ऐसे में इस बार भी नीतीश के उम्मीदवार की जीत आसान नजर आ रही है।
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