'मुजफ्फरपुर की मेयर और उनके देवर के पास 2 वोटर ID कार्ड', तेजस्वी यादव के नए खुलासे से हड़कंप
बिहार वोटर लिस्ट रिवीजन का मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है। इस बीच तेजस्वी यादव ने एक और बड़ा दावा किया है। तेजस्वी ने कहा है कि बीजेपी की मेयर निर्मला देवी के पास दो दो वोटर आईडी कार्ड है।
दिल्ली से लेकर बिहार तक वोट चोरी और वोटर लिस्ट रिवीजन पर बवाल मचा हुआ है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी से लेकर राजद नेता तेजस्वी यादव तक चुनाव आयोग के खिलाफ हल्ला बोल रहे हैं। विपक्ष चुनाव आयोग पर बीजेपी के साथ मिलकर चुनाव में गड़बड़ी करने का आरोप लगा रहा है। इस बीच तेजस्वी ने एक और बड़ा दावा किया है। तेजस्वी ने कहा है कि बीजेपी के बड़े नेताओं के 2-2 वोटर आई कार्ड बनाए गए हैं।
'BJP को फायदा पहुंचाने के लिए चुनाव आयोग कर रहा गड़बड़ी'
तेजस्वी ने मुजफ्फरपुर की मेयर निर्मला देवी को लेकर बड़ा दावा करते हुए कहा है कि बीजेपी की मेयर निर्मला देवी के पास दो दो वोटर आईडी कार्ड है। निर्मला देवी के देवर के पास भी दो वोटर कोर्ड है। बीजेपी को फायदा पहुंचाने के लिए चुनाव आयोग गड़बड़ी कर रहा है। इससे पहले तेजस्वी ने बिहार के डिप्टी सीएम विजय सिन्हा को भी लेकर खुलासा किया था। विजय सिन्हा के पास भी दो EPIC नंबर मिले थे।
तेजस्वी ने क्या-क्या आरोप लगाए?
- श्रीमती निर्मला देवी बीजेपी की बड़ी नेत्री और मुजफ्फरपुर की मेयर है। इनके पास एक दो EPIC ID- REM1251917 और GSB1835164 है। इनके एक ही विधानसभा में दो अलग अलग बूथ पर दो अलग-अलग वोट है। दो अलग-अलग EPIC कार्ड में इनकी दो अलग-अलग उम्र है। SIR में इन्होंने दो अलग अलग गणना फॉर्म भरे।
- मतदाता सूची पुनरीक्षण में इन्होंने दो अलग अलग फॉर्म पर दो अलग अलग साइन किए होंगे? इन दो अलग-अलग फॉर्म पर चुनाव आयोग ने साइन किए कि मेयर ने ख़ुद साइन किए। चुनाव आयोग द्वारा प्रकाशित नई ड्राफ्ट सूची में दो अलग अलग EPIC Card के साथ, दो अलग-अलग उम्र के साथ, एक ही विधानसभा में इनके दो अलग अलग वोट कैसे बन गए?
- ये चुनाव आयोग की मिलीभगत से यही नहीं रुकी- इनके दो देवर है- मनोज कुमार और दिलीप कुमार सुपुत्र श्री अशर्फ़ी लाल। उनके भी दो दो अलग-अलग EPIC Card के साथ दो दो अलग-अलग Booth में दो दो अलग-अलग Vote बने हैं। मतलब इन्होंने भी SIR में दो दो अलग-अलग Form भरे होंगे और दो अलग-अलग Sign किए होंगे।
- जब चुनाव आयोग एक ही विधानसभा में खुद ऐसा कर रहा है तो फिर SIR का क्या मतलब? इसका अर्थ है कि चुनाव आयोग बीजेपी समर्थकों के एक ही घर में अनेक फर्जी वोट बनवा रहा है। ये बीजेपी की मुजफ्फरपुर से संभावित प्रत्याशी है तो क्या चुनाव आयोग इसलिए इनकी मदद के लिए इनके पक्ष में फर्जी वोट रहा है?
- चुनाव आयोग विपक्ष के वोट काटने में युद्ध स्तर पर काम कर रहा है और बीजेपी के पक्ष में जोड़े जा रहा है। बताइए बड़े बड़े लोगों का एक ही विधानसभा में दो अलग-अलग EPIC कार्ड, दो अलग-अलग उम्र के साथ दो अलग-अलग वोट कर दे रहा है। यह चुनाव आयोग की बेईमानी नहीं है तो क्या है?
- बिहार की जनता 2020 से जानती है कि ये लोग वोट चोर है। मात्र 12,756 वोट के अंतर से धांधली कर इन्होंने हमें 15 सीटों में जबरन चुनाव हरवा दिया। अबकी बार जनता इनका ऐसा इलाज करेगी और भगाएगी कि इनके साथ साथ इनकी आने वाली नस्लें भी याद रखेंगी।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कहीं कोई करिश्मा नहीं है, ये लोग चुनाव आयोग जैसी सवैधानिक संस्थानों के बल पर धांधली और हेराफेरी कर, वोटों की चोरी कर सरकार बना रहे हैं।
SIR पर सुप्रीम कोर्ट में आज भी सुनवाई
बिहार वोटर्स लिस्ट रिवीजन पर सड़क से लेकर अदालत तक संग्राम छिड़ा है। इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट में आज भी सुनवाई है। इससे पहले कल हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने ये माना कि आधार कार्ड को नागरिकता का सबूत नहीं माना सकता है। कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग की बात सही है कि आधार कार्ड को नागरिकता के प्रमाण के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता, इसे वैरीफाई करना ज़रूरी है। सुनवाई के दौरान आरोप लगाया गया था कि एक करोड़ वोटर्स के नाम लिस्ट से काटे गए हैं। इस पर अदालत ने कहा कि एक करोड़ का आंकड़ा कहां से आया। सात करोड़ नब्बे लाख कुल वोटर थे जिनमें से 7 करोड़ 24 लाख के नाम ड्राफ्ट रोल में हैं।
कपिल सिब्बल ने क्या आरोप लगाया?
कपिल सिब्बल ने आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में लोगों को मृत बताकर उनके नाम काटे गए हैं। कई ऐसे लोगों को मृत बता दिया गया, जो जिंदा है। इस पर इलेक्शन कमीशन की तरफ से पेश हुए वकील राकेश द्विवेदी ने कहा कि ये सिर्फ ड्राफ्ट रोल है। छोटी-मोटी गलती हो सकती है लेकिन ये कहना कि जिन्हें मृत बताया गया, वो जीवित हैं, ये सही नहीं है।
