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Hindi News बिहार आचार संहिता के बीच पप्पू यादव ने बांटे 5 लाख रुपये, 80 बाढ़ पीड़ित परिवारों की मदद की

आचार संहिता के बीच पप्पू यादव ने बांटे 5 लाख रुपये, 80 बाढ़ पीड़ित परिवारों की मदद की

पप्पू यादव ने बाढ़ पीड़ितों की मदद की। उन्होंने 80 पीड़ित परिवारों को कुल पांच लाख रुपये बांटे। इसका वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वह बाढ़ पीड़ितों के साथ बात करते नजर आ रहे हैं।

Pappu Yadav- India TV Hindi Image Source : REPORTER INPUT पप्पू यादव

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का ऐलान होने के साथ ही पूरे राज्य में आचार संहिता लागू हो चुकी है। इस बीच पप्पू यादव ने बाढ़ पीड़ितों के बीच पांच लाख रुपये बांटे हैं। गुरुवार (9 अक्टूबर) को पूर्णिया सांसद पप्पू यादव वैशाली जिले में थे। वह सहदोई थाना क्षेत्र में गणियारी गांव में कटाव से प्रभावित ग्रामीणों के बीच पहुंचे और उनकी मदद की। पप्पू यादव की तरफ से सभी 80 पीड़ित परिवार के बीच लगभग पांच लाख रुपये बांटे गए।

घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें पप्पू यादव बाढ़ पीड़ितों से बात करते नजर आ रहे हैं और यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि कटाव से लोगों को कितना नुकसान हुआ है।

बाढ़ पीड़ितों की मदद करते रहे हैं पप्पू

पप्पू यादव इससे पहले भी बाढ़ पीड़ितों की मदद करते रहे हैं। इसी वजह से उनका मजबूत जनाधार है। लोकसभा चुनाव 2024 में उन्हें कांग्रेस पार्टी ने टिकट नहीं दिया था। ऐसे में उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की थी। इंडिया गठबंधन ने इस सीट से आरजेडी के नेता को टिकट दिया था। पप्पू यादव विधानसभा चुनाव नहीं लड़ रहे हैं, लेकिन वह खुद को कांग्रेस का सिपाही बताते हैं। भले ही कांग्रेस के शीर्ष नेता उन्हें कोई तवज्जो न देते हों, लेकिन आचार संहिता लागू होने पर उनका पैसे बांटना कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के लिए परेशानी का सबब बन सकता है।

क्या होती है आचार संहिता?

चुनावी आचार संहिता निर्वाचन आयोग द्वारा लागू दिशानिर्देशों का समूह है। ये दिशा निर्देश लोकसभा, विधानसभा, या स्थानीय निकाय चुनावों को स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से कराने के लिए बनाए गए हैं। यह राजनीतिक दलों, उम्मीदवारों, सरकार और मतदाताओं के व्यवहार को नियंत्रित करता है। इसे चुनाव की घोषणा से लेकर मतदान प्रक्रिया पूरी होने तक लागू किया जाता है। चुनावी आचार संहिता के अनुसार धर्म, जाति, भाषा, या समुदाय के आधार पर मतदाताओं को प्रभावित नहीं किया जा सकता। इस दौरान व्यक्तिगत हमले, अपमानजनक भाषा, या भड़काऊ बयानबाजी पर रोक रहती है। वहीं, प्रचार के लिए सार्वजनिक स्थानों का उपयोग निर्वाचन आयोग के नियमों के अनुसार करना होता है।

आचार संहिता के नियम

आचार संहिता लागू होने के बाद सत्ताधारी दल सरकारी संसाधनों (जैसे सरकारी वाहन, भवन, कर्मचारी) का चुनाव प्रचार के लिए उपयोग नहीं कर सकता। इसके साथ ही नई योजनाओं की घोषणा या शिलान्यास जैसे कार्य, जो मतदाताओं को प्रभावित कर सकते हैं, नहीं किए जा सकते हैं। उम्मीदवारों को निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित खर्च सीमा का पालन करना होता है। खर्च का हिसाब नियमित रूप से जमा करना अनिवार्य है। मतदान से 48 घंटे पहले सभी प्रकार के प्रचार (रैलियां, सभाएं, विज्ञापन) बंद करने होते हैं। मतदान केंद्रों के 100 मीटर के दायरे में प्रचार नहीं किया जा सकता। इसके तहत मतदाताओं को डराना, धमकाना, या रिश्वत देना गैरकानूनी है। विज्ञापनों और प्रचार सामग्री को निर्वाचन आयोग की मंजूरी लेनी होती है। झूठी या भ्रामक जानकारी फैलाने पर रोक रहती है। आचार संहिता के उल्लंघन पर निर्वाचन आयोग कार्रवाई कर सकता है और किसी उम्मीदवार की उम्मीदवारी रद्द की जा सकती है।

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