दिल्ली हाई कोर्ट में मंगलवार को आबकारी नीति से जुड़े मामले में सुनवाई हुई। आबकारी नीति से जुड़े CBI मामले में बड़ा फैसला लेते हुए अदालत की सहायता के लिए एमिकस क्यूरी नियुक्त करने का निर्णय लिया है। यह कदम उस समय उठाया गया, जब मामले के तीन प्रमुख पक्षकार, अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक सुनवाई में शामिल नहीं हुए। जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की कोर्ट ने आदेश पारित किया है।
एमिकस नियुक्त करने का फैसला
दरअसल, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने निचली अदालत के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें इन नेताओं को आरोपमुक्त किया गया था। हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान संबंधित पक्षों की गैर-हाजिरी को गंभीरता से लेते हुए अदालत ने एमिकस नियुक्त करने का फैसला किया, ताकि मामले की निष्पक्ष और प्रभावी सुनवाई सुनिश्चित की जा सके।
नहीं लिया जाएगा रिकॉर्ड पर
साथ ही, कोर्ट ने तीनों नेताओं के जवाब दाखिल करने के अधिकार को भी खत्म कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि यदि अब कोई जवाब दाखिल किया जाता है, तो उसे रिकॉर्ड पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
अब 8 मई को अगली सुनवाई
मामले की अगली सुनवाई 8 मई को निर्धारित की गई है, जहां इस पर आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। दिल्ली में आबकारी नीति का मामला काफी सुर्खियों में है। इस मामले में पूर्व की आम आदमी पार्टी सरकार के लोगों के नाम जुड़े हुए हैं।
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