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Hindi News एजुकेशन सबसे पहले मुस्तफा हुसैन बने थे ऑफिसर, आज हर घर में हैं अधिकारी, ये भारत का सबसे अनोखा गांव

सबसे पहले मुस्तफा हुसैन बने थे ऑफिसर, आज हर घर में हैं अधिकारी, ये भारत का सबसे अनोखा गांव

स्थानीय लोग बताते हैं कि पर्व त्यौहार के अवसर पर यह गांव नीली बत्ती वाली गाड़ियों से जगमगा उठता है। दरअसल सभी अफसर अपने गांव में परिवार के साथ त्यौहार मनाने आते हैं। यदि 800 आबादी के किसी गांव में 47 से अधिक लोग अफसर होंगे तो दशहरा, दीवाली और छठ के अवसर पर वह गांव नीली बत्ती के साथ मंत्रमुग्ध क्यों न हो!

अधिकारियों का गांव- India TV Hindi Image Source : FILE PHOTO अधिकारियों का गांव

आजकल सभी युवा नौकरी करना चाहते हैं। नौकरी की चाह में खूब पढ़ाई-लिखाई करते हैं। इसके लिए दिन-रात एक करके कोई ना कोई नौकरी ले लेना चाहते हैं। IAS की तैयारी करने वाले युवा पर्व त्यौहार और घूमना फिरना छोड़कर तैयारी में लगे रहते हैं। इसके बावजूद अनेकों युवा IAS नहीं बन पाते हैं। लेकिन भारत में एक ऐसा भी गांव है जहां सभी घरों में कोई ना कोई IAS, IPS या फिर आईएफएस की नौकरी करने वाले मिल ही जाएंगे। उत्तर प्रदेश के जौनपुर का माधोपट्टी गांव अफसरों का गांव के नाम से विख्यात है। 75 घरों वाले इस गांव में 47 से अधिक IAS, IPS और आईएफएस अधिकारी हैं। इसके साथ-साथ इस गांव के पढ़े-लिखे होनहार युवा इसरो, वर्ल्ड बैंक और अनेकों बड़े जगह ऑफिसर बनकर सेवा दे रहे हैं। इस गांव का नाम ब्रिटिश काल से ही चर्चा में रहा है।

सबसे पहले मुस्तफा हुसैन बने थे अधिकारी

दरअसल साल 1914 में मुस्तफा हुसैन नाम का युवक इस गांव से पहला ऑफिसर बना था। आजादी के बाद साल 1952 में इंदू प्रकाश 13वीं रैंक हासिल करके IAS बना, इस रिजल्ट के बाद माधोपट्टी गांव के युवाओं में अधिकारी बनने की होड़ मच गई। अब हर साल यहां के होनहार युवा IAS या पीसीएस एग्जाम को जरूर क्रैक करते हैं। पढ़ाई के प्रति यहां के युवाओं का जुनून देखते ही बनता है; कड़ी मेहनत के साथ लगातार पढ़ाई करना यहां के युवाओं के संस्कार का हिस्सा बन गया है। 

त्योहारों पर पूरे गांव में दिखती हैं नीली बत्तियां

स्थानीय लोग बताते हैं कि पर्व त्यौहार के अवसर पर यह गांव नीली बत्ती वाली गाड़ियों से जगमगा उठता है। दरअसल सभी अफसर अपने गांव में परिवार के साथ त्यौहार मनाने आते हैं। यदि 800 आबादी के किसी गांव में 47 से अधिक लोग अफसर होंगे तो दशहरा, दीवाली और छठ के अवसर पर वह गांव नीली बत्ती के साथ मंत्रमुग्ध क्यों न हो! आज यह गांव सम्पूर्ण भारत के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बना हुआ है। ऐसा नहीं है कि केवल माधोपट्टी गांव के बेटे ही IAS, IPS, आईएफएस और पीसीएस ऑफिसर बन रहे हैं; यहां की बेटी और बहू भी ऑफिसर बन रही हैं।

सेल्फ स्टडी में विश्वास करते हैं यहां का युवा

इस गांव के युवा IAS बनने के लिए कोचिंग से ज्यादा सेल्फ स्टडी में विश्वास करते हैं। माधोपट्टी गांव के अफसर युवाओं को पढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। एग्जाम की तैयारी में अफसरों का मार्गदर्शन काफी महत्वपूर्ण होता है। बिना किसी ताम-झाम के ये युवा शुरू से ही सही दिशा में तैयारी करते हैं और माधोपट्टी को अफसर का गांव कहलाने में योगदान देते रहते हैं। आज यह गांव भारत के लाखों गांवों का रोल मॉडल बन गया है।

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