नई दिल्ली: उत्तर भारत हो या दक्षिण भारत, अभिनेता से नेता बनने की ललक कई सितारों में हुई। सबने अपनी लोकप्रियता भुनाने की कोशिश की। कुछ फिल्मों में हिट रहे तो राजनीति में फ्लॉप हो गए, तो कुछ ने दोनों ही जगह अपनी सफलता के झंडे गाड़े। उत्तर भारत में अमिताभ बच्चन से लेकर गोविंदा तक राजनीति में उतरे तो वहीं दक्षिण भारत में एमजी रामचंद्रन और एनटी रामाराव अपनी लोकप्रियता के सहारे सियासत में उतरे। उत्तर भारत में तो अधिकांश सितारों को सियासत का रंग नहीं जमा और वो राजनीति से दूर हो गए लेकिन दक्षिण भारतीय सितारे जितने सफल फिल्मों में हुए उससे कहीं ज्यादा सफलता उन्हें राजनीति में मिली, कुछ तो मुख्यमंत्री की कुर्सी में भी बैठे।
उत्तर भारत में जहां सितारों को फैंस ने रुपहले पर्दे पर तो खूब प्यार दिया लेकिन सियासत में आने के बाद उन्हें सफलता का स्वाद चखने को नहीं मिला, वहीं दक्षिण भारत के नायक फिल्मी पर्दे और सियासत दोनों ही जगह नायक ही बने रहे। रजनीकांत ने नए साल के मौके पर अपनी पार्टी बनाने और तमिलनाडु का अगला चुनाव लड़ने का ऐलान किया तो फिर से इस बात की चर्चा होने लगी कि क्या वो सियासत में भी उतने बड़े राजा बन पाएंगे जितने बड़े सुपरस्टार वो फिल्मी पर्दे पर हुए हैं। बात करते हैं उन 10 बड़े फिल्मी सितारों की जो राजनीति में सफल और असफल हुए।
ये सितारे हुए सियासत में फ्लॉप
अमिताभ बच्चन
साल 1969 में ख्वाज़ा अहमद अब्बास के निर्देशन में बनी फिल्म सात हिंदुस्तानी से फिल्मी करियर का आगाज करने वाले अमिताभ बच्चन आज भी बॉलीवुड के सबसे बड़े सुपरस्टार हैं। 70 के दशक में अमिताभ बच्चन एंग्री यंगमैन की छवि के साथ राजनीति में उतरे। अमिताभ को राजीव गांधी ने राजनीति में उतारा था। बच्चन ने इलाहाबाद से साल 1984 का लोकसभा चुनाव लड़ा और दिग्गज नेता हेमवंती नंदन बहुगुणा को मात दी। लेकिन बोफोर्स तोप घोटाले में नाम आने के बाद अमिताभ ने सांसद पद से इस्तीफा दे दिया। उसके बाद बिग बी ने कभी भी राजनीति की तरफ पलटकर नहीं देखा। हालांकि उनकी वाइफ और एक्ट्रेस जया बच्चन आज भी समाजवादी पार्टी की राज्यसभा सांसद हैं।
राजेश खन्ना
1966 में फिल्म ‘आखिरी खत’ से फिल्मी दुनिया में कदम रखने वाले राजेश खन्ना जल्द ही बॉलीवुड के पहले सुपरस्टार बन गए। 1969 से 1971 तक राजेश खन्ना ने लगातार 15 हिट फिल्में दी। वो बॉलीवुड में राज करने लगे। अपनी सफलता का फायदा उठाकर राजेश खन्ना भी राजनीति में उतरे। उन्होंने कांग्रेस को अपने साथ ले लिया। 1991 में राजेश खन्ना ने दिल्ली लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन फिल्मों का सुपरस्टार सियासत की जंग हार गया, राजेश खन्ना बीजेपी के बड़े नेता लाल कृष्ण आडवाणी से चुनाव हार गए। हालांकि 1992 में जब उपचुनाव हुए तो राजेश खन्ना ने इसी सीट से एक और बड़े हीरो और नेता शत्रुघ्न सिन्हा को मात दे दी। लेकिन राजेश खन्ना को भी राजनीति रास नहीं आई और 1996 में उन्होंने राजनीति से संन्यास ले लिया। हालांकि शत्रुघ्न सिन्हा राजनीति में अभी तक बने हुए हैं, फिलहाल वो बिहार के पटना साहिब से सांसद हैं।