लखनऊ: जीवनभर की कमाई लगाकर ऊंची-ऊंची इमारतों में घरों की बुकिंग कराते समय दावे तो बड़े-बड़े किए गए, लेकिन जब भूकंप के झटके आए तो इमारत के भूकंप-रोधी होनी की हकीकत खुलकर सामने आ गई।
हकीकत यह है कि कई जगह लोग अभी भी खंडरनुमा घरों और सरकारी कालोनियों में रहने को मजबूर हैं। रही-सही कसर कमजोर बुनियाद पर अवैध निर्माणों ने पूरी कर दी है।
उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री के निर्देशों के बावजूद शासन-प्रशासन भूकंप आने की अफवाहों को रोकने में सफल नहीं हो पा रहा है, जिससे लोगों की बेचैनी और बढ़ गई है।
भूकंप को आने से रोकना भले ही संभव नहीं है, मगर इससे होने वाली तबाही से बचा जा सकता है। भूकंप-रोधी भवन बनाकर जान-माल की क्षति तो रोकी जा सकती है।
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