Badhaai Ho Movie Review: नीना गुप्ता-गजराज राव ने चुराई लाइमलाइट, आयुष्मान खुराना ने भी किया इम्प्रेस

Badhaai Ho Movie Review: नीना गुप्ता-गजराज राव ने चुराई लाइमलाइट, आयुष्मान खुराना ने भी किया इम्प्रेस

Photo: TWITTER Badhaai Ho Movie Review
मूवी रिव्यू:: बधाई हो
Critics Rating: 4 / 5
पर्दे पर: 18 अक्टूबर, 2018
कलाकार: आयुष्मान खुराना
डायरेक्टर: अमित रविंद्रनाथ शर्मा
शैली: कॉमेडी-ड्रामा
संगीत: तनिष्क बागची, रोचक कोहली, सनी एंड इंद्र बावरा

नई दिल्ली: पहले 'दम लगा के हइशा', 'बरेली की बर्फी' और अब 'बधाई हो', लगता है आयुष्मान खुराना मिडिल क्लास शख्स का रोल निभाने में मास्टर हो गए हैं। 'बधाई हो' के साथ उन्होंने एक बार फिर इम्प्रेस किया है, लेकिन यह फिल्म सिर्फ उनके बारे में नहीं है। फिल्म में उनके मम्मी-पापा के रोल में नजर आए नीना गुप्ता और गजराव राव ने सारी लाइमलाइट चुरा ली है। फिल्म नीना और गजराज के बारे में ही है। फिल्म सिर्फ अनचाहे प्रेग्नेंसी के बारे में नहीं है, बल्कि यह दिखाती है कि एक परिवार कैसे बुरी से बुरी परिस्थिति में हंसता रहता है।

'बधाई हो' के ट्रेलर से ही फिल्म की कहानी पता चल गई थी। फिल्म में आयुष्मान खुराना दिल्ली के यंग लड़के नकुल के रोल में हैं, जिनकी मम्मी (नीना गुप्ता) दादी बनने की उम्र में प्रेग्नेंट हो जाती हैं। इससे वह शर्मिंदगी महसूस करने लगता है और इसका परिणाम यह होता है कि वह अपनी गर्लफ्रेंड रिन्नी (सान्या मल्होत्रा) से ब्रेकअप कर लेता है। वह अपने पिता (गजराज राव) पर इल्जाम लगाता है कि उनकी लापरवाही की वजह से पूरे परिवार को शर्मिंदगी झेलनी पड़ रही है। फिल्म की पूरी कहानी प्रियमवदा (नीना गुप्ता) की प्रेग्नेंसी के 9 महीनों की जर्नी को दिखाता है।

डायरेक्टर अमित रविंद्रनाथ शर्मा ने अपने घर पर भी ऐसे ही हालात का सामना किया था और शायद यही वजह है कि उन्होंने पर्दे पर इस कहानी को बहुत अच्छे ढंग से उकेरा है। कहानी सही है और आप इससे जुड़ा हुआ महसूस कर सकते हैं। फिल्म में उतना ही मेलोड्रामा रखा गया है, जितने की जरूरत थी। फिल्म 130 मिनट की है और यह इसका प्लस पॉइंट भी है। फिल्म का क्लाइमैक्स और अंत अहमियत नहीं रखता, लेकिन आयुष्मान का एक शर्मिंदा बेटे से एक जिम्मेदार बेटे में बदलने की जर्नी देखने लायक है।

Badhaai Ho Movie Review

एक्टिंग की बात करें तो नीना गुप्ता, गजराव राव और दादी सुरेखा सीकरी ने बाजी मार ली है। ऐसा नहीं है कि आयुष्मान और सान्या कम हैं, लेकिन फिल्म शुरू से प्रियमवदा और उनके पति के ईर्द-गिर्द घूमती है। आयुष्मान और सान्या को फिल्म में साइडलाइन नहीं किया गया है, लेकिन नीना और गजराज को अच्छा स्पेस मिला है।

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अगर आप दिल्ली और मेरठ से हैं तो आप कौशिक परिवार से जुड़ा हुआ महसूस करेंगे। भाषा, लाइफस्टाइल और ड्रेसिंग सब सही है। कुछ भी ज्यादा नहीं लगता।

इंडिया टीवी इस फिल्म को देगा 5 में से 4 स्टार।