राम भक्त ले चला रे राम की निशानी.... श्री राम वनवास पर चले जाते हैं और भरत जब ननिहाल से आयोध्या लौटते हैं तो उन्हें पता चलता है कि उनकी मां कैकेयी ने श्रीराम को वनवास भेज दिया जिससे वो राजा बन सकें। इसके बाद भरत अपनी मां से बहुत नाराज होते हैं और श्रीराम को मनाने वन चले जाते हैं, वहां श्रीराम उन्हें समझाकर वापस भेज देते हैं मगर भरत जाते वक्त उनसे उनकी चरण पादुका मांगते हैं और उसे अपने शीश से लगाकर लौटते हैं और रामायण सीरियल में गाना बजता है राम भक्त ले चला रे राम की निशानी....। इन लाइनों को पढ़ते हुए आपके मन में भरत का जो चेहरा दिखा वो कोई और नहीं संजय जोग का है। संजय जोग ने रामानंद सागर की रामायण में भरत का किरदार निभाया था और उस किरदार को अमर कर दिया। लेकिन भरत का रोल निभाने वाले संजय जोग अब हमारे बीच नहीं हैं।
संजय जोग नागपुर के रहने वाले हैं, वहां उनका 24 सितंबर 1955 को जन्म हुआ था। 1980-90 के दौर में संजय टीवी के काफी पॉपुलर एक्टर बन गए, लेकिन वो एक्टर नहीं बनना चाहते थे वो चाहते थे एयरफोर्स में पायलट बनना। संजय ने अपने करियर में 50 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया है और जिसमें से 30 फिल्में मराठी थीं। इसके अलावा उन्होंने गुजराती और हिंदी फिल्में भी की हैं। हिंदी सिनेमा में वो जिगरवाला में नजर आए और भी कई फिल्मों में उन्हें देखा गया।
उन्होंने अपने करियर में 50 से अधिक फिल्मों में काम किया, जिसमें 30 से अधिक फिल्में मराठी भाषा में थीं। कुछ गुजराती और कुछ हिंदी की फिल्में। हिंदी सिनेमा में उन्होंने 'जिगरवाला' से डेब्यू किया। इसके बाद उन्हें कई फिल्मों के देखा गया। रामायण में संजय को भरत नहीं बल्कि लक्ष्मण का रोल ऑफर हुआ था। लेकिन उन्होंने उस वक्त मना कर दिया था, हालांकि बाद में वो खुद रामायण में काम करना चाहते थे लेकिन तब उन्हें भरत का किरदार मिला।
संजय ने खूब नाम और इज्जत कमाई, मगर महज 40 की छोटी सी उम्र में उनका निधन हो गया। लीवर फेल होने की वजह से उनका निधन हुआ। उस वक्त वो घर घर में मशहूर थे और उनके निधन ने फैंस को झकझोर कर रख दिया था। रामायण खत्म होने के कुछ साल बाद उनका निधन हुआ था, वो मनहूस तारीख थी- 27 नवंबर 1995।