जब EVM में इंटरनेट नहीं तो हमें वोटिंग वाले दिन ही कैसे दिखता है कि किस विधानसभा में सुबह 11 बजे तक कितनी हुई वोटिंग?
जब चुनाव आयोग साफ कर चुका है कि EVM में इंटरनेट कनेक्शन नहीं होता है तो वोटिंग वाले दिन उसमें हुई वोटिंग का डेटा चुनाव आयोग तक तेजी से कैसे पहुंचता रहता है। इस खबर विस्तार से पढ़िए पूरी प्रक्रिया।

नई दिल्ली: बिहार में विधानसभा चुनाव के लिए माहौल गरम है। पहले फेज में 121 सीटों पर वोटिंग पूरी हो चुका है, जबकि बाकी 122 सीटों पर दूसरे फेज का मतदान अभी बाकी है। पूरे बिहार में कुल 90 हजार 712 पोलिंग बूथ बनाए गए हैं, जहां 7 करोड़ 42 लाख से ज्यादा वोटर अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जब हजारों बूथों पर एक साथ वोटिंग चल रही होती है, और EVM मशीनें इंटरनेट से भी जुड़ी नहीं होतीं, तो फिर चुनाव आयोग को हर एक-दो घंटे ये अपडेट कैसे मिलता है कि "फलां विधानसभा में सुबह 11 बजे तक इतने प्रतिशत मतदान हो चुका है"? आखिर ये आंकड़े इतनी तेजी से चुनाव आयोग तक पहुंचते कैसे हैं, जो कुछ ही पलों में Voter Turnout App पर दिखने लगते हैं? इसी दिलचस्प सवाल का जवाब खोजने के लिए INDIA TV की टीम ने बातचीत की पीठासीन अधिकारी के रूप में चुनाव करा चुके हिमांशु शुक्ला से, जिन्होंने विस्तार से बताया कि वोटिंग टर्नआउट का डेटा हर पोलिंग बूथ से इतनी तेजी से चुनाव आयोग तक कैसे पहुंचता है।
सवाल- मतदान वाले दिन EVM में हुई वोटिंग का डेटा उसमें बिना इंटरनेट कनेक्शन के इतनी तेजी से चुनाव आयोग तक कैसे पहुंच जाता है?
जवाब- पीठासीन अधिकारी रह चुके हिमांशु शुक्ला ने बताया कि हां ये बात सच है कि EVM में कोई इंटरनेट कनेक्शन नहीं होता है और ना ही वह ऑटोमेटिक तरीके से चुनाव आयोग को रियल टाइम डेटा पहुंचाती है। दरअसल, मतदान से पहले चुनाव के सभी चुनाव कर्मचारियों की ट्रेनिंग कराई जाती है। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें चुनाव आयोग की तरफ से एक APK फाइल उपलब्ध कराई गई थी। उसपर क्लिक किया तो वो Redirect करके MPS App पर ले गई। उस ऐप में मुझे मेरे रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से लॉगिन करना था जो मैंने चुनाव आयोग को उपलब्ध कराया था। इस ऐप के माध्यम से मुझे सुबह 7 बजे पोलिंग बूथ पर वोटिंग स्टार्ट होने की सूचना देनी थी। इसके बाद हर 2 घंटे पर अपडेट करना होता था कि पोलिंग बूथ पर कितनी महिलाओं और कितने पुरुषों ने वोट डाल दिया है। इस तरह हर पोलिंग बूथ से वोटिंग टर्नआउट का डेटा मतदान के साथ-साथ ही चुनाव आयोग तक तेजी से पहुंच जाता है और यही डेटा आगे जाकर ECI के वोटर टर्नआउट ऐप पर दिखाई देता है।
सवाल- क्या वोटिंग टर्नआउट का रियल टाइम डेटा चुनाव आयोग तक पहुंचाने के लिए ऐप के अलावा कोई और माध्यम भी होता है?
जवाब- हिमांशु शुक्ला बताते हैं कि हर पीठासीन अधिकारी को सेक्टर मजिस्ट्रेट को रिपोर्ट करना होता है। ऐप के अलावा पीठासीन अधिकारी, फोन के माध्यम से सेक्टर मजिस्ट्रेट को हर 2 घंटे में वोटिंग टर्नआउट का डेटा उपलब्ध कराते हैं। सुबह 7 बजे वोटिंग शुरू होने से लेकर दिनभर हुए मतदान और शाम को जब वोटिंग समाप्त होती है, ये सारी जानकारी पीठासीन अधिकारी को सेक्टर मजिस्ट्रेट को देनी होती है।
सवाल- वोटिंग वाले दिन के एक-दो दिन बाद जब चुनाव आयोग फाइनल वोटिंग टर्नआउट जारी करता है, तो उसमें कभी-कभी मतदान वाले दिन की शाम को न्यूज चैनल्स पर बताए गए आंकड़ों से थोड़ा फर्क क्यों होता है?
जवाब- हिमांशु शुक्ला के अनुसार, पोलिंग बूथ पर वोटिंग का समय खत्म होने से पहले जो भी वोटर आ जाते हैं उनके वोट डलवाने ही होते हैं भले ही कितनी देर हो जाए। ऐसे में कई बार बूथ पर 1-2 घंटे देर तक भी वोटिंग होती है। मतदान देर तक चलता है तो ये डेटा भी हम ऐप पर देरी से अपलोड कर पाते हैं। हो सकता है कि इसी वजह से चुनाव आयोग जब वोटिंग टर्नआउट के फाइनल आंकड़े जारी करता है तो उसमें ये रिफ्लेक्ट होता है। शायद इसी वजह से कभी-कभी फाइनल डेटा में वोटिंग वाले दिन की शाम को दिखाए गए वोटिंग टर्नआउट प्रतिशत से थोड़ा अंतर होता है।
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