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Hindi News फैक्ट चेक Fact Check: FSSAI ने नहीं दी ORSL बिक्री की अनुमति, वायरल पोस्ट की हकीकत कुछ और, जानें अभी भी क्यों बिक रहा ड्रिंक?

Fact Check: FSSAI ने नहीं दी ORSL बिक्री की अनुमति, वायरल पोस्ट की हकीकत कुछ और, जानें अभी भी क्यों बिक रहा ड्रिंक?

सोशल मीडिया में दावा किया जा रहा है कि FSSAI ने ORSL को बिक्री की अनुमति दे दी है। हालांकि, हकीकत कुछ और है। FSSAI ने ऐसी कोई अनुमति नहीं दी है, लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के कारण अभी भी यह उत्पाद बिक रहा है।

ORSL Viral Post- India TV Hindi Image Source : X/PIBFACTCHECK ORSL से जुड़े वायरल पोस्ट

भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने 14 अक्टूबर को सभी ड्रिंक्स के लिए ओआरएस शब्द के इस्तेमाल पर बैन लगा दिया था। एफएसएसएआई ने साफ किया था कि जो भी प्रोडक्ट विश्व स्वास्थ्य संगठन की गाइडलाइन के अनुसार ओआरएस नहीं बनाते हैं, वह किसी भी तरीके से अपने उत्पाद के नाम में (ORS) शब्द का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं। अब  सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि एफएसएसएआई ने ORSL नाम के ड्रिंक को बाजार में बेचने की अनुमति दे दी है। हालांकि, यह दावा गलत है। 

एफएसएसएआई ने सोशल मीडिया पर इस दावे का खंडन किया है। प्राधिकरण ने साफ किया है कि उसकी तरफ से ऐसी कोई अनुमति नहीं दी गई है। हालांकि, दिल्ली हाईकोर्ट ने उसके आदेश पर स्टे लगाया है। इस वजह से ओआरएस नाम वाले उत्पाद बाजार में बिक रहे हैं, लेकिन एक बार यह मामला सुलझने के बाद बाजार में ऐसा कोई भी उत्पाद नजर नहीं आएगा।

FSSAI ने क्यों लगाया बैन?

भारतीय बाजार में कई उत्पाद ऐसे हैं, जो ORS नाम का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, उनके उत्पाद में यह साफ लिखा होता है कि उनका उत्पाद विश्व स्वास्थ्य संगठन के ओआरएस फॉर्मूले पर आधारित नहीं है। इसके बावजूद अधिकतर लोग नोट नहीं पढ़ते हैं और मिलते-जुलते नाम के कारण ओआरएस की तरह इसका इस्तेमाल करते हैं। वयस्क लोगों पर इसका ज्यादा असर नहीं होता, लेकिन दस्त से पीड़ित बच्चों को ओआरएस नहीं मिलने पर उन्हें खासा नुकसान होता है और कई मामलों में उनकी मौत भी हो जाती है। भारत में प्रति 100 बच्चों की मौत में 13 का कारण दस्त होती है। इस वजह से एफएसएसएआई ने हाई सुगर युक्त ड्रिंक्स के लिए ओआरएस नाम के इस्तेमाल पर रोक लगाई है।

अभी भी मार्केट में क्यों बिक रहे उत्पाद

बाजार में ORSL के अलावा भी कई उत्पाद हैं, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों के अनुसार ORS फॉर्मूले से नहीं बनाए जाते हैं, लेकिन इनका नाम ओआरएस से मिलता-जुलता होता है। मल्टीनेशनल कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन की एक यूनिट JNTL ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि FSSAI ने पहले ऐसे उत्पादों को बेचने की अनुमति दी थी। इसी के अनुसार उन्होंने बड़े पैमाने पर ORSL नाम का उत्पाद बनाया। अब यह बड़ी संख्या में बाजार में मौजूद है। FSSAI ने बिना किसी पूर्व सूचना के ऐसे प्रोडक्ट पर बैन लगा दिया है। इस आदेश के बाद ORSL को जब्त किया जा सकता है। इस पर रोक लगाई जा सकती है। इससे कंपनी को 155-180 करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने लगाई रोक

दिल्ली हाईकोर्ट ने JNTL की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि कंपनी का पक्ष सुना जाना चाहिए। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने FSSAI के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी। हाईकोर्ट के आदेश के चलते ओआरएस नाम का इस्तेमाल करने वाले सभी उत्पाद फिलहाल बाजार में बिक सकते हैं। हालांकि, FSSAI ने साफ किया है कि कोर्ट में मामला निपटने के बाद ऐसे सभी उत्पादों पर बैन लगाया जाएगा और इन्हें बाजार से हटाया जाएगा।

क्या है हकीकत?

FSSAI ने ORSL जैसे सभी उत्पादों पर बैन लगाया था, क्योंकि ये ग्राहकों को भ्रमित करते हैं और असली ओआरएस की बजाय ऐसे उत्पादों का सेवन दस्त से पीड़ित बच्चों के लिए जानलेवा भी हो सकता है, क्योंकि इनमें जरूरी फ्लुइड नहीं होते हैं। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। इस वजह से ORSL जैसे उत्पाद बाजार में बिक रहे हैं, लेकिन FSSAI ने साफ किया है कि वह ऐसे उत्पादों को बाजार से हटाने के लिए प्रतिबद्ध है।

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